डॉक्टर की पढ़ाई कर रही गौरी मंडल और यूपीएससी की तैयारी कर रही बहन ने चावल धुआं के साथ किया टुसू पर्व का आगाज
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। आदिवासी समुदाय के प्रमुख लोकपर्व टुसू का शुभारंभ चावल धुआं के साथ पूरे पारंपरिक उत्साह के साथ हुआ। इस अवसर पर जामदिह गांव में डॉक्टर की पढ़ाई कर रही गौरी मंडल और यूपीएससी की तैयारी कर रही उनकी छोटी बहन की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही, जिन्होंने पारंपरिक संस्कृति को जीवंत रखने में अहम योगदान दिया।

जयपुर में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही गौरी मंडल सोमवार को अपने गांव पहुंचीं और टुसू पर्व की तैयारियों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। उन्होंने अरवा चावल को धोकर ढेकी में कूटने की परंपरा निभाई, जिससे पीठा बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई। ढेकी में कूटे गए चावल से बनने वाला पीठा टुसू पर्व की खास पहचान है, जिसका स्वाद और महत्व दोनों ही अलग है।
गौरी की छोटी बहन, जो यूपीएससी की तैयारी कर रही हैं, ने भी इस पारंपरिक कार्य में बढ़-चढ़कर भाग लिया। आमतौर पर यह परंपरा गांव की महिलाओं द्वारा निभाई जाती है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली और मशीनों के बढ़ते उपयोग के कारण यह परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। ऐसे समय में शिक्षित युवतियों की भागीदारी लोगों के लिए प्रेरणा बन रही है।
टुसू पर्व के अगले दिन मंगलवार को बाउंडी पर्व मनाया जाएगा। इस दिन घर-घर ढेकी में कूटे चावल से पीठा बनाया जाएगा और परिवार के सभी सदस्य मिलकर इसका आनंद लेंगे।
स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि डॉक्टर और प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रही छात्राओं द्वारा परंपराओं को अपनाना यह दर्शाता है कि शिक्षा और संस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं। इससे नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने की सीख मिलती है और लोकसंस्कृति को नई ऊर्जा प्राप्त होती है।

