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    25 लाख खाते में, फिर भी इलाज नहीं—बैंक की लालफीताशाही बनी काल, सेवानिवृत्त शिक्षिका अंजलि बोस का निधन

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarJanuary 9, 2026No Comments2 Mins Read
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    25 लाख खाते में, फिर भी इलाज नहीं—बैंक की लालफीताशाही बनी काल, सेवानिवृत्त शिक्षिका अंजलि बोस का निधन

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    जमशेदपुर के सोनारी की रहने वाली झारखंड सरकार की सेवानिवृत्त शिक्षिका अंजलि बोस की मौत ने बैंकिंग व्यवस्था की संवेदनहीनता और कानूनी जटिलताओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, सोनारी शाखा में करीब 25 लाख रुपये जमा होने के बावजूद समय पर राशि नहीं मिलने से उनका समुचित इलाज नहीं हो सका। सवाल यह है कि क्या बैंक की कानूनी अड़चनें किसी की जान से बड़ी हो सकती हैं और क्या ऐसी लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर मामला दर्ज नहीं होना चाहिए?

    प्राप्त जानकारी के अनुसार अंजलि बोस वर्ष 2008 में कपाली विद्यालय से सेवानिवृत्त हुई थीं और सेवानिवृत्ति के दौरान मिली पूरी राशि उन्होंने एसबीआई सोनारी शाखा में जमा कर दी थी। अविवाहित होने के कारण खाते में किसी को नामिनी नहीं बनाया गया था। बीते कुछ समय से उनकी तबीयत लगातार बिगड़ रही थी। चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए बड़े अस्पताल में रेफर किया, लेकिन बैंक में जमा पैसे समय पर नहीं मिलने से परिजन इलाज की समुचित व्यवस्था नहीं कर सके।

    मृतका की छोटी बहन गायत्री बोस ने कई बार बैंक प्रबंधन से मानवीय आधार पर मदद की गुहार लगाई, लेकिन हर बार कानूनी प्रक्रिया का हवाला देकर सहयोग से इनकार कर दिया गया। मजबूर होकर परिजनों ने भाजपा के पूर्व नेता विकास सिंह को पूरे मामले से अवगत कराया। विकास सिंह ने अस्पताल पहुंचकर सीधे उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम को जानकारी दी।

    उपायुक्त के हस्तक्षेप के बाद देर रात बैंक प्रबंधन हरकत में आया और आज सुबह करीब 10 बजे राशि लेकर अधिकारी एमजीएम अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक सुबह 8 बजे अंजलि बोस का निधन हो चुका था। अस्पताल में बैंक अधिकारियों को परिजनों के आक्रोश का सामना करना पड़ा। बाद में अधिकारियों ने माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति नहीं दोहराने की बात कही।

    यह पूरी घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि जब खाते में पर्याप्त राशि मौजूद थी, तब भी बैंक मानवीय दृष्टिकोण क्यों नहीं अपना सका। डीसी के हस्तक्षेप के बाद बैंक का जागना व्यवस्था की निष्क्रियता को उजागर करता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस लापरवाही के लिए सोनारी एसबीआई शाखा की मैनेजर और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी, या फिर अंजलि बोस की मौत भी फाइलों और प्रक्रियाओं के बीच दबकर रह जाएगी।

    25 लाख खाते में फिर भी इलाज नहीं—बैंक की लालफीताशाही बनी काल सेवानिवृत्त शिक्षिका अंजलि बोस का निधन
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