ईडी की I-PAC पर रेड से बंगाल की सियासत में भूचाल
प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के बीच पहुंचीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, भाजपा ने जांच में दखल का लगाया आरोप
राष्ट्र संवाद संवाददाता
कोलकाता। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की गुरुवार को की गई छापेमारी से पश्चिम बंगाल की राजनीति में जबरदस्त हलचल मच गई। ईडी की टीमों ने एक साथ राजनीतिक रणनीति से जुड़ी कंसलटेंसी फर्म I-PAC के साल्ट लेक स्थित कार्यालय, उसके प्रमुख प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित चार मंजिला आवास और बुर्राबाजार के पोस्टा इलाके में एक व्यापारी के दफ्तर पर दबिश दी।
सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के समय प्रतीक जैन अपने आवास की चौथी मंजिल पर मौजूद थे, जहां ईडी अधिकारियों ने उनसे घंटों पूछताछ की। ईडी का कहना है कि यह कार्रवाई कथित कोयला तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच के सिलसिले में की जा रही है।

मुख्यमंत्री के पहुंचते ही बढ़ा सियासी तापमान
छापेमारी की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं प्रतीक जैन के आवास पर पहुंच गईं। उन्होंने ईडी की कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया और केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को कुचलने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि क्या अब केंद्रीय एजेंसियों का काम विपक्षी दलों को डराना और उनके डेटा व हार्ड डिस्क जब्त करना रह गया है।
भाजपा का तीखा पलटवार
मुख्यमंत्री की मौजूदगी को लेकर भाजपा ने कड़ा ऐतराज जताया। नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने जांच एजेंसियों के काम में सीधा दखल दिया है। उन्होंने कहा कि किसी जांच के दौरान मुख्यमंत्री का मौके पर पहुंचना गंभीर मामला है और इस पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। भाजपा ने I-PAC कार्यालय से वोटर लिस्ट मिलने को लेकर भी सवाल खड़े किए।
क्या है I-PAC
I-PAC एक राजनीतिक कंसलटेंसी फर्म है, जिसकी स्थापना 2013 में प्रशांत किशोर और प्रतीक जैन ने की थी। 2019 के बाद से यह फर्म तृणमूल कांग्रेस के साथ काम कर रही है और 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत में इसकी रणनीति को अहम माना जाता है।
ईडी की छापेमारी, मुख्यमंत्री की कड़ी प्रतिक्रिया और भाजपा के आरोपों के बाद एक बार फिर केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका और उनकी राजनीतिक निष्पक्षता को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है।

