उत्कल उत्सव में देशभर के कलाकारों की बहुरंगी प्रस्तुतियाँ, साहित्य–संस्कृति और कला चेतना का हुआ संगम
राष्ट्र संवाद संवाददाता
सार्थकसंवाद जमशेदपुर और संस्कारभारती जमशेदपुर महानगर इकाई के संयुक्त तत्वावधान में 4 से 8 दिसंबर तक कोणार्क, पुरी और भुवनेश्वर में पंचदिवसीय उत्कल उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें झारखंड, राजस्थान, गुजरात, बिहार, उत्तराखंड, बंगाल, उड़ीसा सहित कई राज्यों के कलाकारों ने ‘कला–कलरव’ शीर्षक से अपनी प्रस्तुतियाँ दीं। उत्सव की अभिकल्पना साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त कवयित्री सुश्री सोनी सुगन्धा द्वारा की गई।
उत्सव के उद्घाटन सत्र में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कत्थक नृत्यांगना डॉ. अनुराधा दुबे, डॉ. नयना डेल्हीवाला तथा डॉ. बालमुकुन्द राजपुरोहित सहित कई प्रख्यात कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को भावपूर्ण बना दिया। मिथिला, गढ़वाल, कुमाऊँ और गुजराती लोक-संस्कृति की झलक भी सत्रों में देखने को मिली।
कोणार्क में ‘इतिहासबोध और भविष्यदृष्टि’ पर आयोजित विशेष सत्र में डॉ. राहुल अवस्थी ने प्रभावी उद्बोधन दिया, जबकि पुरी में ‘धर्म, राष्ट्र और राष्ट्रधर्म’ विषय पर संगोष्ठी आयोजित हुई। भुवनेश्वर में कोल इंडिया के चीफ़ विजिलेंस ऑफिसर श्री ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ने साहित्य में सतर्कता और प्रशासनिक संवेदना पर विशेष व्याख्यान दिया।
उत्कल अनुज लाइब्रेरी के सहयोग से ‘पाठ, पाठक और पुस्तकालय संस्कृति’ पर हुए काव्य–विमर्श में डॉ. राहुल अवस्थी और सुश्री सोनी सुगन्धा की प्रस्तुतियों ने विशेष आकर्षण बटोरा। शाम के अनौपचारिक सत्रों में विभिन्न लोकभाषाओं और बॉलीवुड गीतों की प्रस्तुति ने उत्सव को और जीवंत किया।
उत्सव के दौरान कई रचनाकारों की पुस्तकों का लोकार्पण हुआ तथा विशिष्ट कलाकारों और साहित्यकारों को कोणार्क कलार्णव अलंकरण, प्रेरणाप्रदीप सम्मान, विद्यापति विद्योत सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किए गए। अंतिम दिन राष्ट्रगीत की विशेष प्रस्तुति और आह्वान गीत ‘रसभारत’ के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।

