औद्योगिक क्षेत्र, गम्हरिया के सूत्रधार डी.के. पुरन्दरे नहीं रहे
नीलाचल आयरन लिमिटेड से लेकर वल्लभ स्टील तक झारखंड के औद्योगिकीकरण की कहानी में उनका नाम अमिट रहेगा
राष्ट्र संवाद संवाददाता
मृत्युंजय बर्मन बिहार से अलग होकर झारखंड राज्य बनने के बाद औद्योगिक विकास की नींव रखने वाले प्रमुख सूत्रधारों में शामिल सोनारी आशियाना गार्डन निवासी डी.के. पुरन्दरे का बुधवार को 81 वर्ष की आयु में पुणे स्थित अपने पैतृक आवास पर निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र सहित जमशेदपुर के औद्योगिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई।
औद्योगिक विकास के अग्रदूत
डी.के. पुरन्दरे ने पुणे से धात्विक विज्ञान में इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की थी। पढ़ाई के बाद वे जमशेदपुर आए और उद्योग जगत से सक्रिय रूप से जुड़े। औद्योगिक कानून और मानव संसाधन प्रबंधन की गहरी समझ रखने वाले पुरन्दरे ने काण्ड्रा स्थित नीलाचल आयरन लिमिटेड के स्थापना काल से ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2002 में संयंत्र से उत्पादन शुरू होने तक उन्होंने कंपनी को अपने अनुभव और मार्गदर्शन से नई दिशा दी।
वल्लभ स्टील, दुगधा (गम्हरिया) की सफलता में भी योगदान
पुरन्दरे की दक्षता को देखते हुए लुधियाना के ओसवाल ग्रुप ने उनसे संपर्क किया और दुगधा, गम्हरिया में स्पंज आयरन प्लांट लगाने का प्रस्ताव दिया। उनकी मेहनत और दूरदृष्टि के बल पर वर्ष 2004 में वल्लभ स्टील में उत्पादन आरंभ हुआ।
बाद में उन्होंने चीफ रेसिडेंसियल एग्जिक्यूटिव के रूप में कार्य करते हुए आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में प्रामिस इंडस्ट्रीज की स्थापना साझेदारी में की थी।
लियाजनिंग के मास्टर और सरल व्यक्तित्व के धनी
कॉर्पोरेट जगत में पुरन्दरे अपनी विद्वता, विनम्रता, वाकपटुता और आकर्षक व्यक्तित्व के लिए पहचाने जाते थे। औद्योगिक क्षेत्र में उन्हें लियाजनिंग का मास्टर पीस कहा जाता था। उनकी कार्यशैली ने कई कंपनियों को न केवल उद्योग स्थापित करने में सहायता दी, बल्कि रैयतों के साथ बेहतर संबंध बनाने की संस्कृति भी विकसित की।
समाजसेवा और संगीत से भी था गहरा जुड़ाव
डी.के. पुरन्दरे ने सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में भी उल्लेखनीय योगदान दिया। वे महाराष्ट्र हितकारी मंडल, जमशेदपुर की कार्यकारिणी के प्रमुख सदस्य रहे और समाजसेवी के रूप में उनकी विशिष्ट पहचान थी। कला के क्षेत्र में वे क्लासिकल संगीत के पारखी थे और जमशेदपुर में आयोजित सुर-संगीत कार्यक्रमों में नियमित रूप से शामिल होते थे।
औद्योगिक जगत में शोक की लहर
उनके निधन पर औद्योगिक जगत के कई वरिष्ठ लोगों ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। शोक जताने वालों में जी.डी. बाजपेयी, पी.वी. नरसिंहम, नाजिम खान, शैलेन्द्र पांडे, अनिल गोराई, राजेश झा, जी.एन. झा, मनोज खत्री, बी.एस. मेहरा, दिनेश राणा, आर.के. सिंह, सरस श्रीवास्तव, जगन्नाथ सरकार और योगेश प्रधान शामिल हैं।
डी.के. पुरन्दरे को जमशेदपुर और झारखंड के औद्योगिक इतिहास में हमेशा उस व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाएगा, जिसने रैयतों से भूमि लेकर औद्योगिकीकरण की पहली ठोस नींव रखी थी।

