एक था आरोग्यंम अस्पताल भाग 02
पैसा, पैरवी और पावर से हुआ आरोग्यम हॉस्पिटल का नीलामी!
बैंक , डीआरटी और एक बड़े नेताओं के नाम भी जुड़े विवाद में
देवानंद सिंह
जमशेदपुर: सिदगोड़ा का आरोग्यम अस्पताल अब सुर्खियों में है। अस्पताल की नीलामी के बाद पार्टनर और रेंटर एक होने की स्थिति बन गई है। मामले में बैंक ऑफ बड़ौदा, डीआरटी, प्रदीप डीडवानिया और रितु अग्रवाल का नाम चर्चा में है।

अस्पताल पार्टनरशिप फर्म में डॉ. हरि प्रसाद और मुन्नी देवी पार्टनर थे, जबकि मुन्नी देवी के पति डॉ. सतीश कुमार तिवारी गारंटर। 1 जून 2010 को खोले गए अस्पताल के लिए बैंक से लगभग 3 करोड़ रुपये का लोन लिया गया।
23 दिसंबर 2011 से मुन्नी देवी और सतीश तिवारी ने डॉ. हरि प्रसाद को एफिडेविट और पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए अस्पताल संचालन से बाहर किया। हरि प्रसाद ने बैंक को लगातार गड़बड़ी और रिश्वतखोरी की जानकारी दी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।

बाद में अस्पताल का संचालन राणा रणजीत किशोर द्वारा किया गया। जो बहुत दिन नहीं चला मामला कि मुकदमा तक पहुंच गया इस बीच डॉ हरि प्रसाद ने बैंक के खिलाफ सिविल कोर्ट में शिकायत दर्ज करवाई, जिसमें उनकी शिकायत सही पाई गई। चुकी बैंक का पैसा समय पर नहीं मिला जिसके कारण बैंक ने अस्पताल को एनपीए घोषित कर कब्जा ले लिया।
अब मामला झारखंड हाई कोर्ट में है और डीआरटी, बैंक मैनेजर एवं जीएम को नोटिस भी जारी किया गया। परंतु बैंक डीआरटी ने अस्पताल को नीलम करवाया अस्पताल की नीलामी और संचालन में पैसों, पैरवी और पावर के आरोप गंभीर रूप से उठ रहे हैं।

*अगली कड़ी में सिदगोड़ा थाने में मुकदमा आरोग्यंम अस्पताल में सवेरा बाजार की एंट्री*

