झारखंड विधानसभा में शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव पारित
रांची। झारखंड विधानसभा के पूरक मानसून सत्र का गुरुवार का दिन ऐतिहासिक रहा। सदन में दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भारत रत्न देने का प्रस्ताव परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने पेश किया, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। अब यह प्रस्ताव राज्य सरकार केंद्र को भेजेगी।
पहले दिन ही उठी थी भारत रत्न की मांग

22 अगस्त को सत्र के पहले दिन शोक प्रस्ताव के दौरान ही शिबू सोरेन को भारत रत्न देने की मांग उठी थी। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने दिशोम गुरु के राज्य निर्माण और आदिवासी समाज के उत्थान में योगदान को याद करते हुए यह मांग की थी। जदयू विधायक सरयू राय, आजसू विधायक निर्मल महतो और विधायक अरूप चर्टजी ने भी इस मांग का समर्थन किया था।
CM हेमंत सोरेन ने दिए थे संकेत
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उस दिन ही सदन में संकेत दिया था कि सदस्यों की भावनाओं का सम्मान किया जाएगा। गुरुवार को सत्र के आखिरी दिन इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से पारित कर दिया गया।

गुरुजी के योगदान को मिलेगी पहचान
4 अगस्त को दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में शिबू सोरेन का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद से ही भारत रत्न देने की मांग तेज हो गई थी। पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर ने गुरुजी की समाधि राजघाट की तर्ज पर बनाने, उनके आवास को राजकीय स्मारक घोषित करने और उनकी जीवनी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग की थी। इनमें से तीन मांगों पर सरकार ने कार्रवाई शुरू कर दी है।
जीवन संघर्ष और समाज सुधारक की भूमिका
11 जनवरी 1944 को रामगढ़ के नेमरा में जन्मे शिबू सोरेन ने कम उम्र में ही पिता की हत्या के बाद शिक्षा छोड़ दी और महाजनी-साहूकारी प्रथा के खिलाफ संघर्ष शुरू किया। उन्होंने आदिवासियों को संगठित कर धानकटनी आंदोलन चलाया, रात्रि पाठशालाओं का संचालन किया और नशामुक्ति अभियान भी चलाया।
झारखंड आंदोलन और राजनीति में योगदान

शिबू सोरेन ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) का गठन कर झारखंड राज्य आंदोलन को धार दी। 2000 में झारखंड के गठन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वह तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री, आठ बार लोकसभा सांसद, तीन बार राज्यसभा सांसद और यूपीए सरकार में केंद्रीय कोयला मंत्री भी रहे।
आदिवासी समाज के “दिशोम गुरु”
आदिवासी समाज में शिबू सोरेन केवल एक नेता नहीं, बल्कि समाज सुधारक के रूप में पूजे जाते हैं। उन्हें दिशोम गुरु यानी समाज का पथप्रदर्शक कहा जाता है। उनके योगदान को देखते हुए अब उन्हें भारत रत्न देने की मांग व्यापक समर्थन पा चुकी है।

