जादूगोड़ा बना ‘मिनी जामताड़ा’!
साइबर ठगी में सक्रिय गिरोह, करोड़ों की संपत्ति और विदेश तक कनेक्शन – प्रशासन बेबस
राष्ट्र संवाद विशेष संवाददाता
जादूगोड़ा थाना क्षेत्र साइबर अपराधियों का गढ़ बनता जा रहा है। पूरे क्षेत्र में साइबर ठगी का धंधा खुलेआम फल-फूल रहा है और पुलिस-प्रशासन की पकड़ से बाहर दिख रहा है। यूसिल भाटी न के कर्मचारी नवीन प्रसाद एक महीने से साइबर थाना के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अब तक ठगी गए ₹20,000 की कोई भरपाई नहीं हुई है। वे इलाज के लिए वेल्लोर जाने की तैयारी में थे, तभी साइबर ठगी का शिकार हो गए।

इससे पहले यूसील के वरिष्ठ वैज्ञानिक आर.एल. पटनायक से ₹1.27 करोड़ की ठगी हुई थी, पर 7 महीने बीत जाने के बाद भी उन्हें न्याय नहीं मिला। इन घटनाओं से यह साफ हो गया है कि साइबर अपराधी अब पूरे जादूगोड़ा क्षेत्र में हावी हो चुके हैं।
*युवाओं का संगठित गिरोह, करोड़ों की अवैध कमाई*
साइबर ठगी में सबसे अधिक युवाओं की भूमिका सामने आ रही है। राखा माइंस, कुलड़िहा, आसानबनी, गोपालपुर, भुरका डीह, तीला मुंडा और कोकदा जैसे ग्रामीण इलाकों में ये अपराधी अत्याधुनिक मोबाइल, महंगी गाड़ियां, बड़े-बड़े मकान और दुकानें बनाकर चौंका रहे हैं। ग्रामीणों में चर्चा है कि एकाएक इन युवाओं के पास इतनी संपत्ति कहां से आ गई?

सूत्रों की मानें तो कई युवाओं ने जमीन के बड़े-बड़े प्लॉट खरीद लिए हैं और इनकी संपत्ति करोड़ों में पहुंच चुकी है। इस गिरोह के कुछ सदस्य विदेशी कनेक्शन, विशेषकर सिंगापुर तक से जुड़े बताए जा रहे हैं।
*साइबर ठगों पर बढ़ रहा दबाव, फिर भी प्रशासन असहाय*
पटना और गाजियाबाद के साइबर थानों से कई जादूगोड़ा के अपराधियों को नोटिस भी भेजे गए हैं। जादूगोड़ा पुलिस ने कोकदा से पांच साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी भी की थी, लेकिन यह ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है।

पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मोबाइल चोरी के साथ ही, चुराए गए मोबाइलों से लोगों के खाते से पैसे गायब कर दिए जा रहे हैं। कई पीड़ितों ने इसकी शिकायत भी थाने में दर्ज कराई है।
*मुख्यमंत्री से लेकर विजिलेंस तक पहुंची शिकायतें*
स्थानीय लोगों द्वारा साइबर अपराधियों के नाम प्रशासन को बताए गए हैं, और एसएसपी, डीजीपी तथा मुख्यमंत्री तक शिकायतें भेजी गई हैं। विजिलेंस विभाग ने भी अब इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी है।

पोटका प्रखंड के कलिकापुर, धिरोल जैसे इलाके भी अब तेजी से साइबर ठगी के नए केंद्र बनते जा रहे हैं।
*क्या जादूगोड़ा बनेगा अगला जामताड़ा?*
या फिर पुलिस-प्रशासन समय रहते कसेगा शिकंजा?
सवाल बड़ा है और जवाब का इंतजार पूरे क्षेत्र को है।

