नात शरीफ और मर्सिहा गुनगुनाते हुए मनाया गया मातमी त्यौहार मुहर्रम
राष्ट्र संवाद सं
जामताड़ा: कुंडहित में रविवार को कुंडहित मुख्यालय के अलावे प्रखंड क्षेत्र के बाघाशोला, महेशपुर, विक्रमपुर, पांचकुड़ी, बनकाठी, नवडीहा सहित तमाम मुस्लिम बहुल गांवो में सादगी पूर्ण ढंग से मातमी त्यौहार मुहर्रम मनाया गया। कुंडहित मुख्यालय में मुहर्रम माह के 10वीं तारीख के दिन रविवार को इमाम हुसैन को याद करते हुए हर साल की भांति इस साल भी नात और निशान के साथ मर्सिहा गाते हुए, मातमी जुलूस निकाला गया। मुहर्रम का जुलूस बाघाशोला से निकालकर पुराना बैंक मोड़ होते हुए पुराना थाना पहुँच कर आखड़े में तब्दील हो गई। आखड़े में बाघाशोला के मुहर्रम कमेटी के सदस्य ने एक से एक करतब दिखा कर हसन-हुसैन को याद किया गया। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने यादगारे हसन-हुसैन में अस्थाना, मस्जिद और अपने घर में शिरनी का फतियाखानी किया। हसन-हुसैन की याद में रोजा रखकर शनिवार की रात को नमाज अदा की गई और कुरान-ए-खानी की गई। इधर मुहर्रम के शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर पुलिस प्रशासन की चुस्त-दुरुस्त दिखी। मुख्यालय के विभिन्न स्थानों के अलावे चिन्हित मुस्लिम बहुल गांवो में दंडाधिकारियों के नेतृत्व में पुलिस बल की तैनाती की गई थी। मौके पर कुंडहित थाना प्रभारी प्रदीप कुमार ,समाजसेवी सह कांग्रेस नेत्री पूर्णिमा धर मौजूद थी।
इस्लाम में बेहद खास है माहे मुहर्रम : मौलाना इसहाक आलम
बाघाशोला के इमाम मौलाना इसहाक आलम ने कहा कि इस्लामिक धर्म मे मुहर्रम एक अहम महीना है । इसमें नबी पाक सलल्लाहो ताआला अलेही वसल्लमा के नवासो ने करबला की धरती पर अपनी जान कुर्बान कर दी लेकिन मजहबे इस्लाम पर आँच आने नहीं दिया। उन्होंने अपने खानदान को लुटा दिया मगर दीन-ए-मोहम्मदी को लूटने नहीं दिया । इस माहे मुबारक की एक तारीख है जिसको यौमे आशूरा कहा जाता है। अल्लाह के नबी ने फरमाया है कि उस दिन की फजीलत बेशुमार हैं। अल्लाह रब्बुल इज्जत ने बेशुमार खुबियां इनायत की है। इस माह की 9 वी और 10वी तारीख में रोजे रखे जाते हैं, जिसे आशूरा का रोजा कहा जाता है।

