दलमा क्षेत्र से आदिवासियों एवं अन्य परंपरागत वननिवासियों को उजाड़ने की साजिश के खिलाफ हज़ारों की हुंकार
राष्ट्र संवाद संवाददाता
दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच (कोल्हान) के नेतृत्व में उपायुक्त कार्यालय, जमशेदपुर के समक्ष ऐतिहासिक जनविरोध प्रदर्शन किया गया। यह प्रदर्शन दलमा को इको-सेंसिटिव ज़ोन घोषित करने के नाम पर आदिवासी और अन्य परंपरागत वननिवासी परिवारों को उजाड़ने, उनके पारंपरिक निवासों को ध्वस्त करने और वनाधिकार को दरकिनार करने की सरकारी साजिशों के खिलाफ था।
पटमदा, चांडिल, बोड़ाम, डिमना, पारडीह, गालूडीह, घाटशिला, मुसाबनी सहित कोल्हान के दूर-दराज के क्षेत्रों से हज़ारों की संख्या में ग्रामीण आम बागान मैदान में एकत्र हुए। वहां से सभी प्रदर्शनकारी नारे लगाते हुए रैली के रूप में पैदल मार्च करते हुए उपायुक्त कार्यालय पहुंचे।
महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी। बड़ी संख्या में महिलाएं अपने हाथों में नारे और माँगों से लिखे हुए बैनर लेकर आई थीं, जिनमें लिखा था —
“हम वनवासी हैं, बेघर नहीं होंगे!”
“हम उजाड़े नहीं जाएंगे – जंगल हमारा है!”
महिलाओं के नारों और चेहरों पर दशकों का दर्द और अधिकारों के लिए खड़ा होने की चेतना साफ़ झलक रही थी।
“वन अधिकार कानून का बहाना बंद करो!”
“इको-सेंसिटिव जोन के नाम पर उजाड़ना बंद करो!”
“वन क्षेत्र में रह रहे लोगों को सामुदायिक और व्यक्तिगत वन पट्टा दो!”
हरमोहन महतो ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जब वे बरसों से रह रहे वन भूमि पर व्यक्तिगत पट्टा के लिए आवेदन करते हैं, तो उन्हें उसी जमीन का पट्टा नहीं दिया जाता जिस पर वे वास्तव में रहते हैं। इसके बजाय उन्हें बार-बार इधर-उधर दौड़ाया जाता है

