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    Home » विधायक रोशन लाल चौधरी ने सदन में राज्य के सबसे ज्वलंत मुद्दा विस्थापन को उठाया
    Breaking News झारखंड

    विधायक रोशन लाल चौधरी ने सदन में राज्य के सबसे ज्वलंत मुद्दा विस्थापन को उठाया

    Nizam KhanBy Nizam KhanMarch 28, 2025No Comments4 Mins Read
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    विधायक रोशन लाल चौधरी ने सदन में राज्य के सबसे ज्वलंत मुद्दा विस्थापन को उठाया

    विस्थापित परिवार का सदस्य होने के नाते विस्थापितों का दर्द समझता हूं —
    विधायक रोशन लाल चौधरी

    गुलाम मोहम्मद जकीउल्लाह / बड़कागाँव

    बड़कागाँव — विधानसभा के अंतिम दिन गुरुवार को विधायक रोशन लाल चौधरी ने झारखंड विधानसभा में अपनी बातो को प्रमुखता से रखा। विधायक रोशनलाल चौधरी ने सदन में सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य में भू-अर्जन और विस्थापन को लेकर भू अर्जन अधिनियम 1894 कोल बीयरिंग एक्ट भू अर्जन एवं पुनर्स्थापन में उचित प्रतिकार एवं पारदर्शिता अधिकार अधिनियम 2013 तथा झारखंड स्वेच्छिक भू अर्जन अधिनियम 2010 लागू है । लेकिन इन अधिनियमों में भू अर्जन, पुनर्व्यवस्थापन, पुनर्वास, मुआवजा भुगतान की नीति अलग अलग रहने के कारण राज्य के मूलवासी आदिवासी को विस्थापन के बाद उचित पुनर्वास,पुनर्व्यवस्थापन मुआवजा भुगतान भी अलग अलग होता हैं । जिसके कारण विस्थापन के पश्चात एक दो पीढ़ी के बाद विस्थापितों के परिवार की स्थिति दयनीय हो जाती हैं । विस्थापितों के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए विस्थापन, पुनर्वास, पुनर्व्यवस्थापन को समरूप करते हुए विस्थापन,पुनर्वास, पुनर्व्यवस्थापन आयोग का गठन किया जाए ।

    जिसके जवाब में परिवहन विभाग मंत्री दीपक बिरुवा ने कहा कि
    सरकार के द्वारा राज्य विस्थापन आयोग का गठन किया जाएगा और नियमावली 2024 तैयार किया गया हैं । नियमावली अनुमोदन के प्राक्कलन प्रक्रियाधीन हैं । जिसका गठन 90 दिनों के अंदर कर लिया जाएगा । जबाव के बाद विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा मंत्री जी से मैने अनुरोध किया हैं कि चुकी पूरे झारखंड में लगभग 3200 गांव में 1200 गांव विस्थापित प्रभावित हैं, तथा मैं जिस विधानसभा क्षेत्र से आता हूं वहां लगभग 50% से भी अधिक क्षेत्र विस्थापित प्रभावित हैं । जितने भी अधिनियम 2013, 2010 का जिक्र हुआ हैं, सरकारी पदाधिकारी चाहे राज्य के हो या केंद्र सरकार, एन.टी.पी.सी. के किसी भी नियम का पालन नहीं होता हैं ।पालन कैसे हो सरकार इसे सुनिश्चित करें । क्योंकि जो भी विस्थापित प्रभावित परिवार हैं अपने अधिकार के लिए यदि कार्यालय भी जाते हैं तो कार्यालय में प्रवेश भी नहीं करने दिया जाता हैं । सरकार इसे तय करे अन्यथा पूरा विस्थापित एवं आने वाले समय में पूरा झारखंड विस्थापित होने जा रहा हैं इसलिए एक नीति तो बननी ही चाहिए । विस्थापन नीति और ठोस नीति बननी चाहिए ताकि झारखंडियों को, विस्थापितों को अधिक से अधिक अधिकार मिल सके ।

    जिसका जवाब में मंत्री दीपक बिरुवा ने पुनः जवाब दिया की
    हमलोगो ने स्पष्ट कर दिया हैं कि राज्य गठन के पहले से बहुत तरह से लोगों को विस्थापन झेलना पड़ा हैं । चाहे कोल बीयरिंग एक्ट हो या परियोजना-योजना में किसी के नाम से जमीन अधिकृत की गई हो । वहां के सारे लोग विस्थापित हुए जो पूर्णरूप से पुनर्स्थापित नहीं हो पाए हैं तथा अभी भी विस्थापन का दंश झेल रहे हैं । यह बात एकदम सही हैं । इसलिए राज्य सरकार सह माननीय मुख्यमंत्री ने पूर्व में भी इस बात की घोषणा की हैं कि विस्थापन एवं पुनर्वास आयोग के गठन करने की घोषणा उन्होंने पूर्व में भी किया हैं । दिनांक 08/07/2024 को मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को पारित किया गया हैं और नियमावली बन कर तैयार हैं । हमलोग 90 दिन के अंदर में मंत्रिपरिषद में स्वीकृति कर के आयोग गठन का मार्ग को प्रस्तुत करेंगे । इसलिए आश्वस्त करते हैं कि माननीय सदस्य इस प्रस्ताव को वापस ले ।

    पुनः विधायक रोशन लाल चौधरी ने कहा कि मंत्री जी के जवाब से मैं संतुष्ट हूं, लेकिन 90 दिन के अंदर मैं समझता हूं कि कितने नए-नए परियोजनाओं की शुरुआत हो जाएगी । मैं चाहूंगा कि यदि तब तक के लिए विस्थापितों के हक के लिए आपके सरकार के जो अधिकारी हैं डी.सी., एस.डी.ओ., सी.ओ हैं, जो अधिनियम आपके द्वारा या सरकार के द्वारा बनाया गया हैं कम से कम वह सख्ती से लागू हो, मै आपसे यह अनुरोध करना चाहूंगा ।

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