Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » भागवत कथा के छठे दिन सुनाया कृष्ण रासलीला का प्रसंग
    Breaking News जमशेदपुर झारखंड

    भागवत कथा के छठे दिन सुनाया कृष्ण रासलीला का प्रसंग

    Nizam KhanBy Nizam KhanJanuary 9, 2025Updated:January 9, 2025No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    भागवत कथा के छठे दिन सुनाया कृष्ण रासलीला का प्रसंग

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    भागवत कथा के छठे दिन सुनाया कृष्ण रासलीला का प्रसंग | विजया गार्डन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के षष्ठम दिवस में क्लब ग्राउंड स्थित प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन की कथा प्रारंभ करते हुए कथावक्ता पंडित पवन कृष्ण महाराज जी ने भगवान की अनेक लीलाओं में श्रेष्ठतम लीला रास लीला का वर्णन करते हुए बताया कि रास तो जीव का शिव के मिलन की कथा है। यह काम को बढ़ाने की नहीं काम पर विजय प्राप्त करने की कथा है। इस कथा में कामदेव ने भगवान पर खुले मैदान में अपने पूर्व सामर्थ्य के साथ आक्रमण किया है लेकिन वह भगवान को पराजित नही कर पाया उसे ही परास्त होना पड़ा है रास लीला में जीव का शंका करना या काम को देखना ही पाप है गोपी गीत पर बोलते हुए व्यास जी ने कहा जब तब जीव में अभिमान आता है भगवान उनसे दूर हो जाता है लेकिन जब कोई भगवान को न पाकर विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है उसे दर्शन देते है। भगवान श्रीकृष्ण के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह रुक्मणि माता के साथ संपन्न हुआ लेकिन रुक्मणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया। इस कथा में समझाया गया कि रुक्मणि स्वयं साक्षात लक्ष्मी है और वह नारायण से दूर रह ही नही सकती यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को भगवान के काम में लगाए तो ठीक नही तो फिर वह धन चोरी द्वारा, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत ही प्राप्त हो जाती है। श्रीकृष्ण भगवान व रुक्मणि जी के अतिरिक्त अन्य विवाहों का भी वर्णन किया गया। कथा के दौरान व्यास जी ने ने भजन प्रस्तुत किए।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleउत्क्रमित उच्च विद्यालय लक्ष्मीनगर में मैनेजमेंट गुरु ने सिखाये जीवन के गुर
    Next Article बागबेड़ा ग्रामीण वृहत जलापूर्ति योजना

    Related Posts

    विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान: शिक्षा सुधार या केंद्रीकरण की नई बहस?

    July 11, 2026

    जीव-जंतुओं से सीखें जीने का सही तरीका: प्रकृति के अनमोल इशारे

    July 11, 2026

    भारत की विदेश नीति: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ता भारत का सामर्थ्य और नई रक्षा साझेदारियां

    July 11, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान: शिक्षा सुधार या केंद्रीकरण की नई बहस?

    जीव-जंतुओं से सीखें जीने का सही तरीका: प्रकृति के अनमोल इशारे

    भारत की विदेश नीति: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ता भारत का सामर्थ्य और नई रक्षा साझेदारियां

    संजय राउत का बड़ा खुलासा: पिंपरी-चिंचवड में 400 करोड़ की लूट का आरोप

    कांग्रेस ने पीएम मोदी से पूछा सवाल: राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर क्यों चुप हैं?

    जादूगोड़ा में सवालों के घेरे में ‘चाय वाला करोड़पति’: संपत्ति की जांच की मांग

    जमशेदपुर में चंद्रावती नगर परडीह बस्ती पार्क निर्माण: विधायक सरयू राय की नई पहल

    सरायकेला पुलिस की शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर बड़ी कार्रवाई: दो गिरफ्तार

    रंभा कॉलेज: हीपकीडो स्वर्ण विजेता सम्मानित, अनुशासन समिति की महत्वपूर्ण बैठक

    पोटका प्रखंड में मलेरिया का प्रकोप: मुखिया ने नेल्सन ग्लोबल से की मच्छरदानी की मांग

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.