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    Home » प्रदर्शनकारियों के सामने झुकी बंगाल सरकार, आरजी कर अस्पताल के प्रिंसिपल समेत टॉप 4 डॉक्टर हटाए
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    प्रदर्शनकारियों के सामने झुकी बंगाल सरकार, आरजी कर अस्पताल के प्रिंसिपल समेत टॉप 4 डॉक्टर हटाए

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 22, 2024No Comments5 Mins Read
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    कोलकाता। बंगाल सरकार ने आंदोलनकारी डॉक्टरों के दबाव के आगे झुकते हुए आरजी कर मेडिकल कॉलेज की नवनियुक्त प्रिंसिपल सुहृता पॉल और तीन अन्य अधिकारियों का तबादला कर दिया. ये अधिकारी 9 अगस्त को कैंपस में जूनियर डॉक्टर की बलात्कार-हत्या के बाद से जांच के दायरे में हैं. पॉल को पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के 13 अगस्त को इस्तीफा देने के बाद प्रिंसिपल नियुक्त किया गया था. तबादलों के साथ ही दिन भर चली अशांति का दौर भी खत्म हो गया, जिसमें डॉक्टरों ने साल्ट लेक में सीबीआई के दफ्तर से लेकर स्वास्थ्य विभाग के मुख्यालय स्वास्थ्य भवन तक मार्च निकाला.

     

     

    कोलकाता के बाहरी इलाके में स्थित बारासात मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल नियुक्त की गई पॉल ने घोष से कार्यभार संभालने के बाद से केवल एक दिन के लिए आरजी कर के कार्यालय में काम किया. सूत्रों ने बताया कि पिछले नौ दिनों में उन्होंने स्वास्थ्य भवन से काम किया और अस्पताल की सुरक्षा पर सीआईएसएफ अधिकारियों के साथ बैठक के लिए ही आरजी कर के कार्यालय गईं. प्रिंसिपल के अलावा, पश्चिम बंगाल सरकार ने जिन अन्य तीन डॉक्टरों को हटाया है, उनमें मेडिकल सुपरिटेंडेंट सह डिप्टी प्रिंसिपल, असिस्टेंट सुरपरिटेंडेंट और चेस्ट मेडिसिन डिपार्टमेंट के चीफ शामिल हैं. प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने राज्य स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की थी और अस्पताल में स्टाफ में फेरबदल की मांग की थी.

     

    सुहृता पॉल की जगह मानस बनर्जी, जबकि सप्तर्षि चटर्जी ने मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और वाइस प्रिंसिपल बुलबुल मुखर्जी की जगह ली है. फिलहाल, चेस्ट मेडिसिन हेड अरुणाभा दत्ता चौधरी और असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट द्वैपायन बिस्वास की जगह किसी की नियुक्ति नहीं की गई है. असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट द्वैपायन बिस्वास ही वे अधिकारी हैं, जिन्होंने 9 अगस्त को बलात्कार-हत्या पीड़िता के माता-पिता को फोन करके बताया था कि उनकी बेटी ने आत्महत्या कर ली है.

     

    चेस्ट मेडिसिन डिपार्टमेंट की अरुणाभा दत्ता चौधरी को इसलिए हटाया गया, क्योंकि ट्रेनी डॉक्टर उनके डिपार्टमेंट से जुड़ी थी. प्रदर्शनकारी डॉक्टर मांग कर रहे थे कि उन्हें उस अपराध के लिए जवाबदेह बनाया जाए.

    आरजी कार में पीजी की सेकेंड ईयर की छात्रा प्रतिभा प्रधान ने कहा कि हम एक सहकर्मी के बलात्कार-हत्या और हमारे अस्पताल में हुई बर्बरता के बाद डरे हुए हैं. इन मुश्किल समय में, हमने कई बार अपनी चिंताओं को उजागर करने का प्रयास किया, लेकिन नई प्रिंसिपल सुहृता पाल नहीं आईं. अगर वह संस्थान में आने के लिए भी तैयार नहीं हैं, तो बेहतर है कि वह इस्तीफा दे दें.

    अस्पताल के पूर्व उपाधीक्षक डॉ. अख्तर अली ने सोमवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. संदीप घोष के कार्यकाल के दौरान कथित तौर पर सामने आई गड़बड़ियों और अनियमितताओं की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच कराने की मांग की. दूसरी ओर, सीआईएसएफ के अधिकारी बुधवार सुबह अस्पताल पहुंचे. एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने CISF को अस्पताल की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया था.

    बुधवार को प्रदर्शनकारी छात्रों से मुलाकात करने वाले शीर्ष अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार अस्पताल में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए गंभीर है और इसलिए उसने आंदोलनकारी डॉक्टरों को उनकी मांगें देने का फैसला किया. राज्य के स्वास्थ्य सचिव एनएस निगम ने बुधवार रात मीडियाकर्मियों को बताया कि छात्र (डॉक्टर) आज स्वास्थ्य भवन आए थे. उनकी कुछ मांगें थीं. वे चाहते थे कि वर्तमान प्रिंसिपल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट सह वाइस प्रिंसिपल, सहायक अधीक्षक और चेस्ट मेडिसिन विभाग के चीफ का ट्रांसफर किया जाए. हमने बदलाव करने का फैसला किया है.. जल्द ही अस्पताल में नए अधिकारियों को भेजा जाएगा. सरकार सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए गंभीर है. हम चाहते हैं कि आरजी कार में सेवाएं जारी रहें.

    बुधवार को हजारों डॉक्टरों ने सीजीओ कॉम्प्लेक्स स्थित केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के कार्यालय से साल्ट लेक स्थित स्वास्थ्य भवन तक रैली निकाली थी. इसके बाद डॉक्टरों की एक टीम ने स्वास्थ्य भवन में स्वास्थ्य अधिकारियों से मुलाकात की. छात्रों ने अपनी मांगों के लिए एक घंटे की समयसीमा तय की थी.

    आरजी कार के प्रदर्शनकारी डॉक्टरों में से एक किंजल नंदा ने मीडिया से कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है. हमें न्याय चाहिए. हत्या के पीछे की मंशा का पता लगाया जाना चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए. आज करीब 10,000 डॉक्टरों ने स्वास्थ्य भवन तक मार्च किया. प्रशासन को हमारी मांगें मानने में इतना समय क्यों लगा? मैं नहीं जानता कि इसे नैतिक जीत कहा जाए या नहीं, लेकिन जहां तक ​​विरोध प्रदर्शन का सवाल है, यह निश्चित रूप से पहला कदम है. हालांकि, हमने सरकारी आदेश नहीं देखा है.

    एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की जांच में लापरवाही के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी, जिससे देश भर में हंगामा मच गया था. आरजी कर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से इस्तीफा देने के बाद पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष को कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के प्रिंसिपल के रूप में फिर से बहाल कर दिया गया था. बंगाल सरकार के इस कदम पर छात्रों ने आपत्ति जताई थी.

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