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    हेमंत सोरेन को दोबारा सत्ता सौंपने के मायने

    News DeskBy News DeskJuly 4, 2024No Comments5 Mins Read
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    हेमंत सोरेन को दोबारा सत्ता सौंपने के मायने

    देवानंद सिंह

    झारखंड के पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की जेल से जमानत पर रिहाई के बाद से राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी कि राज्य में नेतृत्व परिवर्तन हो हो गया है। यह बात सच होती भी दिख रही है, क्योंकि गठबंधन की बैठक में एक बार हेमंत सोरेन को राज्य की सत्ता सौंपने पर सहमति बन चुकी है और वर्तमान मुख्यमंत्री चंपई सोरेन को समन्वय समिति का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। फिलहाल, इन सब तथ्यों पर मुहर लग गई है। दरअसल, हेमंत सोरेन के जेल से बाहर आने के साथ ही
    यह हलचल तेज हो गई थी कि राज्य में न केवल सरकार का नेतृत्व परिवर्तन हो सकता है बल्कि आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी को लेकर भी चेहरा तय हो सकता है, लेकिन चुनावों से पहले नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा ज्यादा थी।
    इससे पहले भी यह बात बार-बार उठती रही है कि चंपई सोरेन को हटाकर कल्पना सोरेन को सीएम की कुर्सी पर बैठाया जा सकता है, लेकिन हेमंत सोरेन के जेल से बाहर आने बाद यह भी चर्चा होने लगी थी कि शायद खुद हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाल सकते हैं, इसीलिए इस कड़ी में यह सवाल भी तैर रहा था कि आगामी झारखंड विधानसभा चुनाव में झामुमो का सारथी कौन होगा? मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन, कल्पना सोरेन अथवा पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो चुनाव लड़ेगी, इसीलिए अब जब हेमंत सोरेन को दोबारा सीएम की कुर्सी देने पर सहमति बन गई है तो यह बात भी तय हो गई कि चुनाव का चेहरा भी हेमंत सोरेन ही रहेंगे। देर रात मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के इस्तीफा के बाद हेमंत सोरेन का तीसरी बार मुख्यमंत्री बनना तय हो गया

    हेमंत सोरेन के जेल में रहने के दौरान ऐसा लग रहा था कि कल्पना सोरेन झामुमो का मुख्य चेहरा बन सकती हैं, इसी वजह से उनकी राजनीति के मैदान में जबरदस्त इंट्री कराई गई और वह विधानसभा उपचुनाव में जीती भी। जब हेमंत सोरेन जेल से बाहर आए तो यह भी कयास लगाए जा रहे थे कि वह भी चुनाव में मुख्य चेहरा हो सकते हैं, क्योंकि हेमंत सोरेन के जेल से बाहर आने के बाद झामुमो में भी नई ताकत नजर आने लगी थी, इसीलिए नेतृत्व परिवर्तन की संभावना तेज हो गई थी। पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष गत शुक्रवार को पांच महीने जेल में काटने के बाद बाहर आएं हैं। इसी साल 31 जनवरी को सोरेन को ईडी ने गिरफ्तार किया था। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद झारखंड की राजनीति बड़े बदलाव हुए। झामुमो ने चंपाई सोरेेन को मुख्यमंत्री बनाया, वहीं लोकसभा चुनाव में हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को चेहरा बनाया। कल्पना सोरेन ने बखूबी अपनी भूमिका निभायी। साथ ही, गांडेय विधानसभा सीट के लिए हुए उपचुनाव में जीत हासिल की। लोकसभा चुनाव में झामुमो को दो सीटों की बढ़त मिली और कल्पना सोरेन ने राजनीति में अपनी धाक दिखायी।

     

    हेमंत सोरेन के बाहर निकलने के बाद झामुमो के साथ ही इंडिया गठबंधन को भी ताकत मिली है। ऐसा लग रहा है कि एक बार फिर झारखंड की राजनीति नयी राह पकड़ेगी, क्योंकि हेमंत सोरेन न केवल चुनावी मैदान में इंडिया गठबंधन की धुरी होंगे, बल्कि वह विधानसभा चुनाव का नेतृत्व भी करेंगे। जेल से बाहर आने के बाद उनके लिए अब चुनावी अभियान चलाना भी सहज होगा, इसीलिए भी चंपाई सोरेन सरकार को लेकर अटकलें लग रही थीं, क्योंकि विधानसभा चुनाव में समय बहुत कम रह गया है।
    ऐसे कयासों के पीछे बीते दिनों वर्तमान सीएम चंपाई सोरेन द्वारा अपने कई कार्यक्रमों को स्थगित करना भी मुख्य कारण माना जा रहा था। सीएम को दुमका जाना था, लेकिन वो नहीं गए। बुधवार को 15 सौ पीजीटी शिक्षकों को नियुक्ति पत्र का भी वितरण करना था, जिसे भी स्थगित कर दिया गया था। बदलाव कब होगा, इसको लेकर थोड़ा संशय था, लेकिन बुधवार को यह तस्वीर साफ होने के बाद यह संशय दूर हो गया है, जिसके आगामी चुनावों को लेकर कई मायने हैं। फिर भी, जब तक चेहरा नहीं बदलता, तब तक भी सरकार के कामकाज में हेमंत सोरेन की दखल बढ़ जाती, क्योंकि जेल में रहते हुए जो परेशानियां थीं, वह अब नहीं रहतीं। वह चंपाई सोरेन सरकार की सीधे मॉनिटरिंग करते। भले ही, मुख्यमंत्री के रूप में हेमंत सोरेन ना दिखते, लेकिन वह पावर सेंटर रहते, लेकिन जब स्वयं एक बार हेमंत सोरेन को सत्ता सौंपने को लेकर सहमति बन गई है तो अब इन सब की जरूरत नहीं, क्योंकि वही खुद पावर सेंटर बनने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री चमकाई सोलर ने इस्तीफा दे दिया

     

     

     

    दूसरा, हेमंत सोरेन के बाहर निकलने के बाद झारखंड में इंडिया गठबंधन के अंदर भी सहूलियत रहेगी, क्योंकि हेमंत कांग्रेस के नेताओं से सीधा संवाद करते रहेंगे। विधानसभा चुनाव को भी लेकर खाका जल्द तैयार होगा। रांची हो या फिर दिल्ली बातचीत में आसानी हो जायेगी। विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस आलाकमान को भी परेशानी नहीं रहेगी, क्योंकि उसे भी राज्य में एक सर्वमान्य चेहरे की जरूरत थी, इसका चुनावों में काफी असर देखने को भी मिलेगा।

    Meaning of handing over power to Hemant Soren Rashtra Samvad Editorial Devanand Singh
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