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    Home » सृष्टि पिता भगवान शिव ने विवाह पद्धति को स्थापित कर एवं आनंदमूर्ति ने पौरोहित्य गिरी का अधिकार देकर महिला को सशक्त बनाया
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    सृष्टि पिता भगवान शिव ने विवाह पद्धति को स्थापित कर एवं आनंदमूर्ति ने पौरोहित्य गिरी का अधिकार देकर महिला को सशक्त बनाया

    Devanand SinghBy Devanand SinghMarch 8, 2024No Comments3 Mins Read
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    सृष्टि पिता भगवान शिव ने विवाह पद्धति को स्थापित कर एवं श्री श्री आनंदमूर्ति ने पौरोहित्य गिरी का अधिकार देकर महिला को सशक्त बनाया

    महिलाएं केवल भौतिक क्षेत्र में ही नहीं आध्यात्मिक क्षेत्र में भी विकसित करने के लिए महिला एवं पुरुष को समान रूप से अधिकार प्रदान करता है आनंद मार्ग

    आनंद मार् ने महिलाओं को पौरोहित्य गिरी अधिकार देकर महिला सशक्तिकरण को मजबूत किया है*

     

    जमशेदपुर :- 8 मार्च 2024

    भगवान सदाशिव इस धरा पर आज से 7000 वर्ष पूर्व आए।
    उस समय समाज में व्याप्त विषमता को दूर कर एक सूत्र में बांधने के लिए भगवान शिव ने समाज को बहुत कुछ दिया। उस समय भी महिलाएं काफी शोषित थी भगवान शिव के आगमन के पहले समाज में विवाह प्रथा नहीं थी।

     

    एक पुरुष कितनों के साथ शारीरिक शोषण करता था पूरा समाज असंगठित एवं अव्यवस्थित था, जितने ज्यादा कन्याओं का शारीरिक शोषण करता था वह उतना ही बलशाली कहलाता था।भगवान शिव ने सर्वप्रथम पार्वती से विवाह कर विवाह पद्धति को स्थापित कर महिलाओं को सबसे पहले इस पृथ्वी पर सम्मान दिया। उन्होंने सबसे पहला विवाह पार्वती से किए महिलाओं को मर्यादित ढंग से जीने का अधिकार दिया इतना ही नहीं आध्यात्मिक तंत्र योग साधना का भी अधिकार महिलाओं को भगवान शिव ने हीं दिया पहला आध्यात्मिक तंत्र योग साधना की दीक्षा माता काली एवं दूसरी दीक्षा अपनी पुत्री भैरवी को देकर एक जड़ संस्कार को खत्म कर महिला एवं पुरुष को आध्यात्मिक योग साधना का समान अधिकार दिया, उन्होंने कहा कि महिलाएं केवल भोग की वस्तु नहीं उन्हें भी आध्यात्मिक रूप से विकसित होने का अधिकार है।

     

     

     

    आनंद मार्ग प्रचारक संघ की अवधुतिका आनंदआराधना आचार्या का कहना है कि जमशेदपुर एवं उसके आसपास महिलाओं को शारीरिक मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से विकसित करने के लिए कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। महिला सशक्तिकरण की बात अब केवल दिखावा ही रह गया है ,महिलाओं को हर स्तर पर अधिकार देना होगा तभी महिलाओं का सर्वांगीण विकास संभव है।महिला तो भौतिक स्तर पर स्वालंबी हो रही है परंतु उन्हें मानसिक एवं आध्यात्मिक स्तर पर भी विकसित होने का अवसर प्रदान करना होगा ।हम महिलाओं को केवल पौरोहित्य गिरी का अधिकार ही नहीं बल्कि महिलाओं द्वारा वैवाहिक कार्यक्रम, दाह संस्कार कर्म, श्राद्ध कर्म करने का भी अधिकार समाज को देना होगा।

     

     

    आज तक समाज में पुरुष पौरोहित्य के द्वारा ही सारे धार्मिक कर्मकांड संस्कार कार्यक्रम संपन्न होता था आनंद मार्ग के संस्थापक श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने महिलाओं को पौरोहित्य गिरी का अधिकार देकर महिला सशक्तिकरण को मजबूत किया समाज में सभी को समान अधिकार है इससे किसी को वंचित करना घोर पाप है। महिला एवं पुरुष समाज रूपी गाड़ी के दो पहिए हैं इनके समान अधिकार के बिना समाज का सर्वांगीण उत्थान संभव नहीं है महिला एवं पुरुष को आनंदमार्ग में समान अधिकार दिया गया है। *महिलाओं को भी मानसिक ,शारीरिक एवं आध्यात्मिक उत्थान का अधिकार मिलना चाहिए।अंधविश्वास से भी महिलाओं को ऊपर उठाना होगा।शादी विवाह के लिए सभी समय शुभ है ,जब सभी भगवान के ही बनाए हुए हैं तो सब कुछ समान है हर समय शुभ है। इसका भेदभाव समाज में खत्म करना होगा तभी समाज का सर्वांगीण विकास संभव होगा। आचार्या ने कहा कि नारी और पुरुष दोनों एक ही परम पिता के संतान है । इसलिए जीवन की अभिव्यक्ति और अधिकार के क्षेत्र में दोनों को समान अधिकार है।

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