नई दिल्ली. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा ने चुनावी राजनीति से संन्यास का ऐलान किया है. हासन में पत्रकारों से बात करते हुए सदानंद गौड़ा ने कहा कि अब उनके लिए संन्यास लेने का समय आ गया है इसलिए मैंने भविष्य में कोई चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है.
सदानंद गौड़ा ने बड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा “30 साल तक मेरी पार्टी ने मुझे सब कुछ दिया है. बीएस येदियुरप्पा के बाद मैं पार्टी में सबसे बड़ा लाभार्थी रहा हूं. मैं 10 साल तक विधायक रहा और एक साल तक कर्नाटक का मुख्यमंत्री रहा. मैं 20 साल तक सांसद रहा. मैंने नरेंद्र मोदी सरकार में सात साल तक बतौर कैबिनेट मंत्री अपनी सेवाएं दी है. चार साल तक बीजेपी कर्नाटक राज्य इकाई का अध्यक्ष रहा. पार्टी से हमें सब कुछ मिला है. अगर मैं इससे ज्यादा की इच्छा रखूंगा तो लोग मुझे स्वार्थी कहेंगे. अब नए लोगों को मौका मिलना चाहिए”
बेंगलुरु उत्तर से लोकसभा सदस्य और पूर्व केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा के इस ऐलान को आगामी 2024 लोकसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. गौड़ा ने जुलाई 2021 में केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया था. मोदी सरकार में रसायन और उर्वरक मंत्री रहने के अलावा गौड़ा ने रेलवे, कानून और सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन जैसे विभाग भी संभाले थे. सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज थी कि BJP उन्हें 2024 के लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं देगी. जिसके संकेत मिलने के बाद उन्होंने चुनावी राजनीति को अलविदा बोल दिया है. सदानंद गौड़ा ने बीते दिनों जेडीएस और बीजेपी के गठबंधन पर सार्वजनिक तौर पर अपनी नराजगी का इजहार किया था. जिससे पार्टी में सियासी हलचल काफी बढ़ी हुई है.
बीते दिनों एक कन्नड़ अखबार को दिए इंटरव्यू में सदानंद गौड़ा ने कहा “JDS के साथ गठबंधन का फैसला कर्नाटक के पार्टी नेताओं की राय लेने के बाद करना चाहिए था. अगर प्रदेश BJP के नेता गठबंधन का विरोध करते तो केंद्रीय नेतृत्व पहले उन्हें समझाता-बुझाता और इसके बाद आगे बढ़ता. केंद्रीय नेतृत्व ने ऐसी कोई कोशिश नहीं की और ना ही प्रदेश के किसी नेता के साथ कोई चर्चा की. यहां तक कि कोर कमेटी के साथ भी इस मुद्दे पर बातचीत नहीं की गई. JDS के साथ मिलकर काम करना पार्टी के नेताओं के लिए आसान भी नहीं होगा. कल शीर्ष नेतृत्व हमसे उम्मीद करेगा कि राज्य के नेताओं के तौर पर हम जेडीएस को साथ लेकर चलें. पिछले चुनाव में JDS ने BJP का जमकर विरोध किया था. अब अचानक से मिलकर चुनाव लड़ना कैसे संभव है? मेरा मानना है कि JDS के साथ गठबंधन का फैसला तुरंत लेने से पहले कुछ वक्त लेना चाहिए था और सावधानी के साथ सभी पहलुओं पर विचार करना चाहिए था”

