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    Home » हल्दीपोखर में बिजली संकट पर आंदोलन की तैयारी: ग्रामीणों ने की हल्दीपोखर अलग फीडर की मांग
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    हल्दीपोखर में बिजली संकट पर आंदोलन की तैयारी: ग्रामीणों ने की हल्दीपोखर अलग फीडर की मांग

    Aman OjhaBy Aman OjhaJuly 5, 2026Updated:July 5, 2026No Comments4 Mins Read
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    पोटका प्रखंड के अर्ध शहरी क्षेत्र हल्दीपोखर में बिजली आपूर्ति की सुविधा अलग बने फीडर से नहीं मिलने के खिलाफ शीघ्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। यह घोषणा जिला परिषद सदस्य सूरज मंडल, हल्दीपोखर पूर्वी पंचायत की मुखिया देवी कुमारी भूमिज व ग्रामीणों ने रविवार को प्रेसवार्ता कर की। इस प्रेस वार्ता में ग्रामीणों ने अपनी तीन साल पुरानी मांग को दोहराते हुए कहा कि अब हल्दीपोखर अलग फीडर की सुविधा न मिलने पर वे शांतिपूर्ण आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। उनकी मुख्य मांग है कि हल्दीपोखर पूर्वी व पश्चिम पंचायत के लिए स्वीकृत अलग फीडर का काम जल्द से जल्द पूरा किया जाए ताकि उन्हें नियमित बिजली मिल सके।

    क्यों जरूरी है हल्दीपोखर अलग फीडर?

    दरअसल, हल्दीपोखर पूर्वी और पश्चिम पंचायतों के लिए अलग फीडर की स्वीकृति वर्ष 2023 में ही सरकार द्वारा दे दी गई थी। यह कदम क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और नियमितता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया था। ग्रामीणों की उम्मीदें परवान चढ़ी थीं, लेकिन जल्द ही उन्हें निराशा हाथ लगी। अलग फीडर के तत्कालीन ठेकेदार ने यहां अधूरा काम कर दिया और उसके बाद फरार हो गए। इस लापरवाही के कारण, हल्दीपोखर के कुछ ही मुहल्लों को अलग फीडर की सुविधा मिल पा रही है, जबकि अधिकांश क्षेत्र अभी भी पुराने, बोझिल सिस्टम से जूझ रहे हैं।

    ग्रामीणों का दैनिक संघर्ष

    इस अधूरे काम का खामियाजा क्षेत्र के हजारों ग्रामीण भुगत रहे हैं। तीन वर्षों से वे अनियमित बिजली आपूर्ति की समस्या से जूझ रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ रहा है क्योंकि शाम को अक्सर बिजली गुल रहती है। छोटे व्यवसायी, जो बिजली पर निर्भर हैं, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। गृहिणियों को भी दैनिक कामकाज में परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गर्मी के मौसम में तो स्थिति और भी विकट हो जाती है, जब बिजली कट से जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल बिजली की बात नहीं, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता और अधिकारों का हनन है। कई बार वोल्टेज की समस्या और बार-बार ट्रिपिंग से उनके बिजली के उपकरण भी खराब हो जाते हैं।

    जिला परिषद सदस्य सूरज मंडल और मुखिया देवी कुमारी भूमिज ने इस मुद्दे को लेकर कई बार बिजली विभाग और उपायुक्त स्तर पर अपनी बात रखी है। उन्होंने बार-बार मांगपत्र सौंपकर गुहार लगाई कि हल्दीपोखर में अलग फीडर की पूर्ण सुविधा जल्द बहाल की जाए। लेकिन इन सभी प्रयासों का कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी हल्दीपोखर अलग फीडर की पूर्ण सुविधा बहाल नहीं हो सकी है, जिससे जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।

    आंदोलन की राह पर ग्रामीण: अल्टीमेटम और तालाबंदी की धमकी

    अब ग्रामीणों ने आंदोलन का रुख करने का फैसला किया है। इसके तहत पहला कदम 7 जुलाई को उठाया जाएगा, जब एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से मिलकर हल्दीपोखर में पुनः अलग फीडर की सुविधा शुरू करने की मांग करेगा। मुखिया देवी कुमारी भूमिज ने स्पष्ट घोषणा की है कि यदि 15 दिनों के भीतर हल्दीपोखर के सभी क्षेत्रों में नियमित बिजली आपूर्ति हेतु हल्दीपोखर अलग फीडर का काम शुरू नहीं हुआ, तो ग्रामीण हाथों पर हाथ धरे नहीं बैठेंगे। उनका साफ कहना है कि इसके बाद वे हाता बिजली ग्रिड में तालाबंदी करेंगे। इस कदम से पहले, बिजली विभाग को भी इस मांग से विधिवत अवगत कराया जाएगा।

    इस आंदोलन में स्थानीय समुदाय का पूरा समर्थन मिल रहा है। प्रेसवार्ता के दौरान उत्पल बोस, रोहित गुप्ता, कृष्णा मंडल, सूरज साहु, मोना राय, रंजन दास, मधु सूत्रधर सहित कई अन्य ग्रामीण उपस्थित थे, जिन्होंने इस संघर्ष में अपनी एकजुटता दिखाई। एक ग्रामीण, सूरज साहु ने कहा, ‘हमें अब और इंतजार नहीं कर सकते। तीन साल बहुत होते हैं। हमें हमारी मूलभूत सुविधा चाहिए और हम इसके लिए लड़ने को तैयार हैं।’ ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल एक बिजली की समस्या नहीं, बल्कि सरकारी उदासीनता के खिलाफ उनकी आवाज है। वे झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) जैसी संबंधित संस्थाओं से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं, ताकि हल्दीपोखर को आखिरकार अपने हिस्से की रोशनी और हल्दीपोखर अलग फीडर की सुविधा मिल सके।

    ग्रामीण आंदोलन पोटका फीडर समस्या बिजली संकट हल्दीपोखर
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