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    Home » नेपाल से तिब्बत तक रेललाइन बिछा रहा है चीन, भारत के लिये खतरे की घंटी
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    नेपाल से तिब्बत तक रेललाइन बिछा रहा है चीन, भारत के लिये खतरे की घंटी

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 7, 2020No Comments3 Mins Read
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    काठमांडू. भारत-चीन सीमा विवाद के बीच नेपाल ने भी बीते दिनों लिपुलेख में सेना की एक पूरी टुकड़ी तैनात कर भारत को संदेश देने की कोशिश की है. अब खबर आ रही है कि चीन बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव के तहत नेपाल से लेकर तिब्बत तक रेल लाइन बिछा रहा है, जो भारतीय सीमा के बेहद करीब से होकर गुजरती है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत के साथ तनाव बढ़ता देख न सिर्फ इस रेल लाइन के काम में तेजी लाई गई है, बल्कि चीन ने इस रेलवे डील में और ज्यादा निवेश करने का फैसला किया है.

    साल 2018 में इसके लिए नेपाल और चीन के बीच में डील हुई थी लेकिन सीपीईसी पर हो रहे खचेज़् के चलते इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया था. अब क्योंकि सीपीईसी के कई प्रोजेक्ट्स रुके हुए हैं और भारत के साथ तनाव बढ़ता जा रहा है ऐसे में इस रेल लाइन को जल्द से जल्द पूरा करने पर चीन का पूरा फोकस है.

    बता दें कि बीआरआई के तहत चीन नए सिल्क रोड के प्लान पर काम कर रहा है और इसके तहत चीन ने कई देशों में इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए डील की है. पाकिस्तान के साथ बन रहा इकॉनोमिक कॉरिडोर भी इसी का हिस्सा है. हाल ही में चीन ने तिब्बत में इन्फ्रास्ट्रक्चर में करीब 146 अरब डॉलर निवेश करने का प्लान बनाया है.

    ये निवेश पहले से जारी प्रॉजेक्ट्स को पूरा करने के अलावा नए प्रॉजेक्ट्स शुरू करने के लिए भी किया जाएगा. इसमें लंबे वक्त से लंबित नेपाल से तिब्बत के बीच रेल लिंक को पूरा करने का काम भी शामिल है. चीन तिब्बत-नेपाल के बीच काठमांडू और तिब्बत के दूसरे सबसे बड़े शहर शिगात्से को जोडऩे वाली रेलवे लाइन पर भी जोर दे रहा है.

    वैसे तो बीआरआई के तहत बन रहे प्रोजेक्ट्स भारत के लिए लगातर ख़तरा बने हुए हैं लेकिन ये रेल लाइन सामरिक दृष्टि से काफी खतरनाक मानी जा रही है. बीआरआई के तहत 72 किमी रेलवे लाइन तिब्बत से काठमांडू होकर लुंबिनी तक जाएगी जो भारतीय सीमा के करीब है. यहां नेपाल चीन और भारत के बीच का बफर जोन है जिसे भारत अपना प्राकृतिक साथी मानता है लेकिन चीन ने इस प्रोजेक्ट के जरिए वहां अपनी पैठ बढ़ानी शुरू कर दी है.

    चीन लगातार नेपाल के इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स में बड़े स्तर पर निवेश कर रहा है. उधर पेंटागन ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि बीआरआई और अन्य निवेश के जरिए चीन लगातार भारत के चारों तरफ मौजूद देशों में सैन्य अड्डे बना रहा है.

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