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    Home » निर्देश के बाद भी स्कूलों में लकड़ी,कोयला से बनता है मध्याह्न भोजन
    Breaking News झारखंड

    निर्देश के बाद भी स्कूलों में लकड़ी,कोयला से बनता है मध्याह्न भोजन

    Nizam KhanBy Nizam KhanMarch 4, 2020Updated:March 4, 2020No Comments2 Mins Read
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    जामताड़ा

    स्कूलों में लकड़ी,कोयला से बनता है मध्यान्ह भोजन

     

    धूआं मनुष्य के लिए लिए ही नहीं बल्कि पूरे पर्यावरण के लिए हानीकारक है।महीलाएं लकड़ी,कोयला व गोबर के लीद से भोजन बनाने पर बिमारी के शिकार होते हैं।केंद्र सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत लोगों को गैस कनेक्शन देने का काम किया गया है।ताकी महीलाएं गैस से भोजन बनाये।जिससे लोग बिमारी से बच सके।पर आज भी कुंडहित प्रखंड के विभिन्न स्कूलों में लकड़ी,कोयले व घोयठा से भोजन बनता है।जिससे धूआं आने पर स्कूली बच्चे बिमारी के शिकार होने के कगार आ सकते हैं।बता दें राष्ट्र संवाद ने मंगलवार को कुंडहित प्रखंड के आदर्श मध्यम विद्यालय कुंडहित,उत्क्रमित मध्य विद्यालय सपसपिया,उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय बाघाशोला में लकड़ी व कोयले से मध्याह्न भोजन बनाते देखा गया।

    धूआं से स्कूली बच्चे प्रभावित:स्कूलों में मध्याह्न भोजन गैस में नहीं बनकर लकड़ी,कोयला व गोबर के उपले से जलावन से भोजन बनाने से स्कूल में धूआं-धूआं हो जाता है।जिससे स्कूली बच्चों को पढ़ाई करने में भारी परेशानीयों का सामना करता पड़ता है।दूसरी ओर स्कूली बच्चे बिमारी के चपेट में आ सकते हैं।

    किया कहते है प्रभारी:उत्क्रमित मध्य विद्यालय सपसपिया के प्रभारी प्रधानाध्यापक अजित कुमार मंडल ने कहा कि दो दिनों से गैस नहीं है।गैस भरा दिया जायेगा और गैस से भोजन बनेगा।उप्रावि बाघाशोला के प्रभारी प्रधानाध्यापक उत्तम कुमार ने कहा जल्द ही गैस भराकर गैस से भोजन बनेगा।आमवि कुंडहित के प्रभारी प्रधानाध्यापक किसी काम से बाहर थे।

    क्या कहते हैं बीईईओ:
    सभी को कड़ा निर्देश दिया जायेगा कि गैस से माध्यह्न भोजन बनाए।ऐसा नहीं करने पर उक्त के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जायेगी।

    एस्थेर मुर्मू,बीईईओ,कुंडहित

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