Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
      • दैनिक ई-पेपर
      • ई-मैगजीन
      • साप्ताहिक ई-पेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » अयोध्या विवाद:  मध्यस्थता पर सुको ने फैसला रखा सुरक्षित
    Breaking News Headlines राष्ट्रीय

    अयोध्या विवाद:  मध्यस्थता पर सुको ने फैसला रखा सुरक्षित

    Devanand SinghBy Devanand SinghMarch 6, 2019No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    नयी दिल्ली. अयोध्या विवाद की मध्यस्थता के सवाल पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को फैसला सुरक्षित रखा. आज निर्मोही अखाड़े को छोड़कर रामलला विराजमान समेत हिंदू पक्ष के बाकी वकीलों ने मध्यस्थता का विरोध किया. यूपी सरकार ने भी इसे अव्यावहारिक बताया है जबकि मुस्लिम पक्ष मध्यस्थता के लिए तैयार है. अयोध्या विवाद में मध्यस्थता के लिए सुप्रीम कोर्ट ने नाम मांगे हैं. बुधवार को कोर्ट ने करीब एक घंटे की सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा.सुप्रीम कोर्ट में हिन्दू महासभा मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं है. उसने कहा है कि बिना सभी पक्षों की बात सुने मध्यस्थता का आदेश नहीं दिया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम हैरान हैं कि विकल्प आजमाए बिना मध्यस्थता को खारिज क्यों किया जा रहा है!! कोर्ट ने कहा अतीत पर हमारा नियंत्रण नहीं है पर हम बेहतर भविष्य की कोशिश जरूर कर सकते हैं.

    सुप्रीम कोर्ट ने मामले को लेकर कहा कि जब वैवाहिक विवाद में कोर्ट मध्यस्थता के लिए कहता है तो किसी नतीजे की नहीं सोचता. बस विकल्प आज़माना चाहता है. हम ये नहीं सोच रहे कि कोई किसी चीज का त्याग करेगा,हम जानते हैं कि ये आस्था का मसला है. हम इसके असर के बारे में जानते हैं.सुनवाई के दौरान जस्टिस बोबडे ने कहा कि हम मामले में प्रतिफल चाहते हैं. यह केवल जमीन से नहीं बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ा मामला है. जब हिंदू पक्ष ने कहा कि मध्यस्थता का कोई अर्थ नहीं होगा क्योंकि हिंदू इसे एक भावुक और धार्मिक मुद्दा मानते हैं तो न्यायमूर्ति एस ए बोबडे ने कहा कि हमने भी इतिहास पढ़ा है और अतीत पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है. हम जो कर सकते हैं वह केवल वर्तमान के बारे में है.

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleकांग्रेस गठबंधन का हिस्सा, हमसे अलग होने का सवाल ही नहीं उठता:अखिलेश 
    Next Article नौकरी मांगने वाले नहीं, देने वाले बनें ,सरकार जल्द बनाएगी नीति – मुख्यमंत्री

    Related Posts

    मोहम्मद यूनुस के इस्तीफ़े की अटकलों के बीच बांग्लादेश में लोकतंत्र की नई परीक्षा

    May 25, 2025

    भर्ती में समानता की वापसी: सामाजिक-आर्थिक बोनस अंकों पर हाईकोर्ट की सख्ती

    May 25, 2025

    भारतीय राष्ट्रवाद को नई आँखों से देखिए!

    May 25, 2025
    Leave A Reply Cancel Reply

    अभी-अभी

    मोहम्मद यूनुस के इस्तीफ़े की अटकलों के बीच बांग्लादेश में लोकतंत्र की नई परीक्षा

    भर्ती में समानता की वापसी: सामाजिक-आर्थिक बोनस अंकों पर हाईकोर्ट की सख्ती

    भारतीय राष्ट्रवाद को नई आँखों से देखिए!

    रबीन्द्रनाथ महतो – एक जननेता से संवाद का अनुभव

    मोहम्मद यूनुस के इस्तीफ़े की अटकलों के बीच बांग्लादेश में लोकतंत्र की नई परीक्षा

    भारतीय राष्ट्रवाद को नई आँखों से देखिए! राजा सिर्फ राज्य बनाते हैं,ऋषियों के सांस्कृतिक अवदान से बनता है राष्ट्र

    राष्ट्र संवाद हेडलाइंस

    श्रमजीवी पत्रकार संघ हरियाणा की हांसी जिला इकाई का हुआ गठन सैकड़ो पत्रकारों ने ली संघ की सदस्यता

    अंसार खान जवाहर नगर रोड नंबर 13 ए के बस्ती वासियों के बीच पहुंचे

    आरडी रबर कंपनी में मजदूरों के समर्थन में पहुंचे पूर्व विधायक अरविंद सिंह, कंपनी पर लगाया वादा खिलाफी का आरोप

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2025 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.