Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » उत्तराखंड: ऐतिहासिक प्राचीन गोपीनाथ मंदिर एक तरफ झुका, गर्भ से टपकने लगा पानी- दरारें आईं
    Breaking News Headlines धर्म

    उत्तराखंड: ऐतिहासिक प्राचीन गोपीनाथ मंदिर एक तरफ झुका, गर्भ से टपकने लगा पानी- दरारें आईं

    Devanand SinghBy Devanand SinghJune 28, 2023No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

     

     

    उत्तराखंड: ऐतिहासिक प्राचीन गोपीनाथ मंदिर एक तरफ झुका, गर्भ से टपकने लगा पानी- दरारें आईं
    चमोली. उत्तराखंड के सबसे प्राचीनत्तम मंदिरों और विराट मंदिरों में एक चमोली जिले के मुख्यालय गोपेश्वर में स्थित गोपीनाथ मंदिर के एक हिस्से में खिसकाव और मंदिर के पत्थरों के हिलने की चर्चा ने सबका ध्यान आकृष्ट किया है। गोपीनाथ मंदिर के पुजारी हरीश भट्ट सहित अन्य पुजारियों ने गोपीनाथ मंदिर के एक क्षेत्र में खिसकाव आने और मंदिर के अंदर पानी टपकने पर चिंता प्रकट करते हुए पुरातत्व विभाग समेत सभी का ध्यान इस ओर ध्यान आकर्षित किया।

     

     

    गोपीनाथ गोपेश्वर के पुजारी हरीश भट्ट ने मंदिर के अस्तित्व पर खतरे की चिंता प्रकट की है। धर्म जगत से जुड़े लोगों का ध्यान और चिंता इस मामले पर बढ़ी है। मामले के संज्ञान में आने पर अधिकारियों ने भी मंदिर का बाहरी तौर पर सर्वेक्षण किया है। गोपेश्वर गोपीनाथ मंदिर उत्तराखंड का ही नहीं उत्तर भारत के सबसे प्राचीनत्तम मंदिरों में एक हैं। उत्तराखंड के सबसे विशाल मंदिरों में गोपेश्वर गोपीनाथ मंदिर है।

     

     

    पुरातत्व विभाग के अभिलेख इस मंदिर को सातवीं सदी से लेकर नौवीं सदी का मंदिर बताते हैं। कुछ शोधकर्ताओं और पुरातत्व वेत्ताओं और इतिहास कारों के अनुसार यह मंदिर तीसरी सदी में फिर से निर्मित हुआ। उससे पूर्व भी यहां पर मंदिर था । गोपीनाथ गोपेश्वर के इस मंदिर की ऊंचाई 65 फीट से अधिक है। नागर शैली का यह मंदिर कत्यूरी साम्राज्य के समय बना। ऐसा इतिहासकार मानते हैं। भारत के प्रसिद्ध इतिहासकार डा. यशवंत सिंह कटोच गोपेश्वर गोपीनाथ मंदिर को उत्तराखंड के प्राचीनतम मंदिरों में एक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण , पुरातत्व और इतिहास की दृष्टि से महत्वपूर्ण मंदिर बताते हैं।

     

     

     

    भगवान शिव के मंदिरों में से सबसे प्राचीन मंदिर है गोपेश्वर गोपीनाथ का शिव मंदिर। मंदिर के गर्भ गृह में भगवान भोलेनाथ गोपीनाथ का दिव्य और पवित्र शिव लिंग साक्षात शिव स्वरूप है। पंडित मोहन प्रसाद भगवान गोपीनाथ के स्वरूप को साक्षात शिव बताते हैं।
    गोपेश्वर गोपीनाथ मंदिर को प्राचीन मंदिर निर्माण शैली में शिखर, गीर्वा, स्कंध , जंघा और पाद रूप में देखा जाता है। वर्तमान में इस मंदिर के स्कंध भाग के सूप नासिका क्षेत्र के खिसकने की बात सामने आयी है। मंदिर के अंदर विगत कई वर्षों से जरा सी बरसात में निरंतर पानी टपकने की शिकायत और चिंता से पुजारी लोग और धर्म जगत से जुड़े लोग पुरातत्व विभाग को अवगत करा चुके हैं। पुरातत्व विभाग वर्तमान में मंदिर के परिसर समेत अन्य क्षेत्र में मरम्मत कार्य भी कर रहा है।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleबकरीद से पहले सीएम योगी बोले, तय स्थान पर ही हो कुर्बानी
    Next Article गोलमुरी :नाले में पानी भरने से हुए कटाव ,सटे घरों का दीवार ढहा, घरों का सामान क्षतिग्रस्त

    Related Posts

    छात्र आंदोलन के बीच बेगूसराय पुलिस ने की शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील

    July 25, 2026

    बिहार विधानसभा में सत्ता पक्ष ने सरकार को घेरा: जातीय पहचान और आरक्षण पर तीखे सवाल

    July 24, 2026

    बिहार विधानसभा में जातीय पहचान और आरक्षण पर सत्ता पक्ष ने घेरा सरकार को

    July 24, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    छात्र आंदोलन के बीच बेगूसराय पुलिस ने की शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अपील

    बिहार विधानसभा में सत्ता पक्ष ने सरकार को घेरा: जातीय पहचान और आरक्षण पर तीखे सवाल

    बिहार विधानसभा में जातीय पहचान और आरक्षण पर सत्ता पक्ष ने घेरा सरकार को

    ठाणे में मौत का तांडव: जगदाले एवेसा के पीछे हवा में लटका 250 किलो मलबा, जान का खतरा

    जगदाले एवेसा के पीछे लटका 250 किलो मलबा: ठाणे में बड़ा हादसे का खतरा

    बहुड़ा यात्रा: भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा में लाखों श्रद्धालु, कड़ी सुरक्षा

    जल संकट का असंतुलित प्रबंधन: अस्तित्व पर मंडराता खतरा – ललित गर्ग का विश्लेषण

    जल संकट: असंतुलित प्रबंधन से अस्तित्व पर मंडराता खतरा

    पेपर लीक पर कठोर कानून और संवाद की जरूरी पहल

    पेपर लीक रोकने के लिए कठोर कानून के साथ संवाद भी जरूरी: देवानंद सिंह

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.