जिला पुलिसिंग की दो तस्वीरें चांडिल में: एक तरफ दंड और दाग, दूसरी तरफ देश में नाम
राष्ट्र संवाद संवाददाता संजय शर्मा
चांडिल सरायकेला-खरसावां सेवा ही लक्ष्य है—पुलिस का यह नारा चांडिल अनुमंडल में बीते एक माह के भीतर सवालों और सराहना, दोनों के बीच झूलता नजर आया। एक ही जिले से पुलिसिंग की दो बिल्कुल विपरीत तस्वीरें सामने आईं। एक ओर ईचागढ़ थाना प्रभारी द्वारा नेता तरुण महतो की कथित अमानवीय पिटाई का मामला, जिस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए तत्कालीन थाना प्रभारी विक्रमादित्य पांडे पर डेढ़ लाख रुपये का अर्थदंड लगाया। दूसरी ओर चौका थाना ने 2025 की समाप्ति पर ऑल इंडिया रैंकिंग में चौथा और झारखंड में पहला स्थान हासिल कर जिले का नाम देशभर में रोशन किया।
*हाईकोर्ट की सख्ती, पर पुलिस प्रशासन की चुप्पी*
ईचागढ़ थाना क्षेत्र में एक माह पूर्व कड़कती ठंड की काली रात में अवैध बालू परिवहन पर सवाल उठाने वाले नेता तरुण महतो को थाने लाकर कथित रूप से अमानवीय पिटाई किए जाने का मामला तूल पकड़ता गया। हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी पर 1.50 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया।
चौंकाने वाली बात यह रही कि इस पूरे प्रकरण के बाद भी जिला पुलिस अधीक्षक की ओर से कोई सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया। नतीजतन आम लोगों के बीच असंतोष और असहिष्णुता का संदेश गया। सवाल उठने लगे—क्या पुलिस की जवाबदेही सिर्फ अदालतों तक सीमित है?
*अवैध कारोबार और पुलिस की साख पर सवाल*
ईचागढ़ थाना क्षेत्र लंबे समय से अवैध कारोबार का गढ़ बना रहा है। नशीले मादक पदार्थ, अवैध शराब, लोहा, कोयला, पत्थर और सुवर्णरेखा नदी से अवैध बालू खनन व परिवहन—सब कुछ खुलेआम। आरोप हैं कि सिंडिकेट के जरिये, सराइकेला जिले के पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमबंगाल सीमावर्ती इलाकों तक अवैध बालू का नेटवर्क फैला हुआ है, जहां रोजाना लाखों की वसूली होती है। इन आरोपों ने जिला पुलिस प्रशासन को कई बार किरकिरी का सामना कराया।
*जिले के चौका थाना की चमक, बजरंग महतो की मिसाल*
इसी अंधेरे के बीच चौका थाना से उम्मीद की किरण भी दिखी। तत्कालीन थाना प्रभारी बजरंग महतो की कर्तव्यनिष्ठा और बेहतर पुलिसिंग का नतीजा रहा कि देश के करीब 18 हजार थानों में चौका थाना चौथे स्थान पर पहुंचा। झारखंड में पहला स्थान हासिल कर सरायकेला जिले को नई पहचान दिलाई।
बजरंग महतो ने साल के अंत में जिला पुलिस की छवि सुधारने में अहम भूमिका निभाई, जो न केवल सरायकेला बल्कि पूरे झारखंड के लिए एक मिसाल बन गई।
नए साल में नई पुलिसिंग?
अब सवाल बड़ा है—क्या नए साल में पुलिस और पब्लिक के बीच भरोसे का सेतु बनेगा? क्या जवाबदेही और पारदर्शिता को प्राथमिकता मिलेगी, या फिर ईचागढ़ जैसी घटनाएं पुलिस की साख पर दाग लगाती रहेंगी ?
एक ही जिले की ये दो तस्वीरें बताती हैं कि पुलिसिंग का रास्ता साफ भी हो सकता है और धुंधला भी। अब फैसला जिला पुलिस प्रशासन के हाथ में है। आने वाला वक्त बताएगा तस्वीर क्या होगी ?

