लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
चांडिल में धंसा पहाड़ का ढलान, सड़क पर मलबा आने से आवागमन बाधित हुआ है। मंगलवार को हुई मूसलाधार बारिश ने निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज के पास पहाड़ी ढलान की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चांडिल में धंसा पहाड़ का ढलान: घटना का विवरण
चांडिल गोलचक्कर के समीप निर्माणाधीन रेलवे ओवरब्रिज के पास मंगलवार को मूसलाधार बारिश के दौरान पहाड़ का एक हिस्सा अचानक दरक गया। पहाड़ काटकर बनाई गई नई सड़क पर मिट्टी और पत्थरों का बड़ा हिस्सा आ गिरा। मलबा सड़क पर फैलने से आवागमन प्रभावित है।
काण्ड्रा की ओर जाने वाले इस मार्ग पर मलबा गिरने की घटना ने निर्माणाधीन सड़क की सुरक्षा व्यवस्था के साथ पहाड़ी ढलान की स्थिरता को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक सड़क निर्माण के दौरान पहाड़ काटे जाने के बाद ढलान के संवेदनशील हिस्सों को सुरक्षित करने के पर्याप्त उपाय नहीं किए गए। बारिश के दौरान ऐसे हिस्सों से मिट्टी और चट्टानों के खिसकने का खतरा लगातार बना हुआ है।
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. ईशा बर्मन की चेतावनी: सिर्फ मलबा हटाना समाधान नहीं
पर्यावरण विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता डॉ. ईशा बर्मन, पीएच.डी., आईआईटी (ISM) धनबाद के अनुसार, भारी बारिश में पहाड़ी ढलान का धंसना केवल वर्षा का स्वाभाविक परिणाम नहीं माना जा सकता। पहाड़ की कटाई से ढलान की प्राकृतिक संरचना, वनस्पति आवरण और वर्षाजल के प्रवाह में बदलाव होने पर उसकी स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने बताया कि लगातार बारिश का पानी मिट्टी और चट्टानों की दरारों में पहुंचकर ढलान के भीतर जल-दाब बढ़ाता है। इससे मिट्टी की पकड़ कमजोर हो सकती है और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे क्षेत्रों में सड़क निर्माण के साथ Slope Stability Assessment, प्रभावी Drainage System, Erosion Control और Native Vegetation-based Slope Stabilisation को प्राथमिकता देना जरूरी है। अधिक जानकारी के लिए IIT (ISM) धनबाद की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
डॉ. बर्मन ने कहा कि सड़क से मलबा हटा देना स्थायी समाधान नहीं है। ढलान की स्थिरता और वर्षाजल के प्राकृतिक निकास का तकनीकी एवं पर्यावरणीय मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
बारिश के साथ बढ़ सकता है भूस्खलन का खतरा
ग्रामीणों ने संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी से पहाड़ी ढलान का तत्काल निरीक्षण कराने, मलबा हटाने तथा संवेदनशील हिस्सों में रिटेनिंग वॉल, सुरक्षा जाल और प्रभावी जलनिकासी की व्यवस्था करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो भारी बारिश में दोबारा ऐसी घटना गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
प्रमुख उपाय और आगे की राह
विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है।
- Slope Stability Assessment अनिवार्य रूप से किया जाए।
- प्रभावी Drainage System का निर्माण हो।
- Erosion Control के लिए स्थानीय वनस्पति का उपयोग हो।
- Native Vegetation-based Slope Stabilisation को प्राथमिकता दी जाए।

