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    Home » रेलवे के निजीकरण का प्रश्न नहीं उठता, फर्जी विमर्श मत गढ़े विपक्ष: रेल मंत्री
    Headlines राजनीति

    रेलवे के निजीकरण का प्रश्न नहीं उठता, फर्जी विमर्श मत गढ़े विपक्ष: रेल मंत्री

    Devanand SinghBy Devanand SinghDecember 11, 2024No Comments6 Mins Read
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    रेलवे के निजीकरण का प्रश्न नहीं उठता, फर्जी विमर्श मत गढ़े विपक्ष: रेल मंत्री

    नयी दिल्ली:  रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि विपक्षी दलों को भारतीय रेल के निजीकरण का फर्जी विमर्श गढ़ने के विरुद्ध आगाह क्योंकि इस परिवहन सेवा के निजीकरण का प्रश्न ही नहीं उठता।

    उन्होंने लोकसभा में ‘रेल (संशोधन) विधेयक, 2024’ पर चर्चा का जवाब देते हुए यह भी कहा कि भारतीय रेल का पूरा ध्यान गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर है, वहीं युवाओं को रेलवे में अवसर देने के उद्देश्य से इस समय 58,642 रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है।

    विधेयक पर गत चार दिसंबर को सदन में चर्चा में भाग लेते हुए कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने सरकार पर रेलवे के निजीकरण की दिशा में बढ़ने का आरोप लगाया था। चर्चा में 72 सांसदों ने भाग लिया था। पिछले कई दिन से विभिन्न मुद्दों पर सदन में गतिरोध के कारण रेल मंत्री का जवाब नहीं हो सका था।

    बुधवार को रेल मंत्री वैष्णव के जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से ‘रेल (संशोधन) विधेयक, 2024’ को पारित कर दिया।

     

     

     

    वैष्णव ने चर्चा के जवाब में कहा, ‘‘कई सदस्यों ने निजीकरण होने का विमर्श बनाने की कोशिश की। कृपया फर्जी विमर्श बनाने की कोशिश मत करिए। आपका संविधान वाला फर्जी विमर्श विफल हो चुका है। अब कोई फर्जी विमर्श नहीं गढ़ें।’’

    उनका कहना था, ‘‘कहीं निजीकरण का कोई प्रश्न नहीं है। मैं हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं कि कृपया इस फर्जी विमर्श को आगे नहीं बढ़ाएं। रक्षा और रेलवे दो ऐसे विषय हैं, जिन्हें राजनीति से दूर रखकर इन्हें आगे बढ़ाने की जरूरत है।’’

    रेल मंत्री ने कहा, ‘‘रेलवे का पूरा ध्यान गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर है। रेलगाड़ियों में गैर-एसी डिब्बे दो तिहाई होते हैं और एसी डिब्बे एक तिहाई हैं…करीब 12,000 नए सामान्य कोच बनाए जा रहे हैं। हमारा प्रयास है कि हर ट्रेन में जनरल डिब्बे ज्यादा हों।’’

    उनके अनुसार, रेलवे सुरक्षा पर पूरा जोर दिया गया है और व्यापक पैमाने पर काम हुआ है।

     

     

     

    मंत्री ने कहा कि 1.23 लाख किलोमीटर लंबी पुरानी पटरियों को बदला गया है तथा नई प्रौद्योगिकी का सहारा भी लिया गया है।

    वैष्णव ने कहा, ‘‘हम हर घटना की जड़ में जाते हैं और प्रक्रिया, तकनीक समेत जहां भी बदलाव जरूरी हो, वह करके रेलगाड़ियों के पटरी से उतरने तथा ट्रेन हादसों की संख्या को कम करेंगे और सुरक्षा बढ़ाएंगे। इसके लिए मोदी सरकार प्रतिबद्ध है।’’

    वैष्णव ने कहा, ‘‘बहुत स्पष्ट तौर पर बताना चाहता हूं कि कानूनी ढांचे में सरलीकरण के लिए यह विधेयक लाया गया है। रेलवे बोर्ड का कानून 1905 में बना था। 1905 और 1989 के रेलवे संबंधी कानूनों की जगह एक ही कानून होता है तो आसानी होती है।’’

    रेलवे अधिनियम 1989 में भारतीय रेलवे बोर्ड अधिनियम 1905 को एकीकृत करने के लिए यह विधेयक लाया गया है।

    रेल मंत्री ने कुछ सदस्यों की आपत्ति के संदर्भ में कहा, ‘‘संसद की भूमिका पहले जैसे ही रहेगी और इस भूमिका में कोई बदलाव नहीं होगा।’’

     

     

     

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे में व्यापक बदलाव हुआ है।

    वैष्णव के अनुसार, सभी अधिकृत रेलवे क्रॉसिंग पर व्यक्तियों की तैनाती है या फिर वहां फ्लाईओवर बना दिए गए हैं।

    उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में 2,000 फ्लाईओवर और अंडरपास बनाए गए हैं जो संप्रग सरकार की तुलना में तीन गुना हैं।

    रेल मंत्री ने कहा कि गत 10 वर्षों में रेलगाड़ियों में 3.10 लाख नए शौचालय बनाए गए हैं।

    उन्होंने ‘वंदे भारत’ ट्रेन का उल्लेख करते हुए कहा कि यह रेलगाड़ी ‘आत्मनिर्भर भारत’ की पहचान बन गई है तथा यह विश्व की कई रेलगाड़ियों की तुलना में कई पैमानों पर बेहतर है।

    वैष्णव ने कहा, ‘‘60 वर्षों में विद्युतीकरण 21 हजार किलोमीटर में हुआ था, लेकिन 10 वर्षों में यह 44 हजार किलोमीटर में हुआ है।’’

    उनका कहना था, ‘‘140 करोड़ लोगों का देश है। यहां रेलवे की क्षमता को व्यापक रूप से बढ़ाने की जरूरत है।’’

    मंत्री के अनुसार, इस सरकार से पहले रेलवे का बजट 25-30 हजार करोड़ रुपये का होता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उसे बढ़ाकर 2.52 लाख करोड़ रुपये किया गया है।

    उनका कहना था कि इन 10 वर्षों में 31 हजार किलोमीटर नई पटरियां बिछाई गई हैं।

    वैष्णव ने कहा कि 15 हजार किलोमीटर रेलवे पटरियों पर रेल सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ का काम हुआ है।

    वैष्णव का कहना था, ‘‘जो काम समृद्ध देशों में 20 साल में हुआ है, वह भारत में पांच साल में हुआ है।’’

    उन्होंने रेलवे में नौकरियों के संबंध में कहा, ‘‘मैं स्पष्ट रूप से बताना चाहूंगा कि संप्रग सरकार के समय 4,11,000 लोगों को नौकरी मिली थी, जबकि मोदी सरकार में 5,02,000 युवाओं की भर्ती रेलवे में की गई है।’’

    वैष्णव ने देश में रेलवे भर्ती परीक्षाओं का जिक्र करते हुए कहा कि बिना किसी प्रश्नपत्र लीक की शिकायत के सुगमता से ये परीक्षाएं हो रही हैं और दशकों पुरानी मांग के अनुरूप वार्षिक कलैंडर के हिसाब से भर्ती होती है।

     

     

    उन्होंने बताया कि रेलवे में इस समय 58,642 रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया चल रही है।

    वैष्णव ने कहा, ‘‘रेलवे नौजवानों को अधिक से अधिक अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध है।’’

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर पूर्व क्षेत्र के राज्यों में रेलवे के विकास में अभूतपूर्व काम किया है और कई राज्यों में रेलवे परियोजनाओं पर तेजी से काम हो रहा है।

    उन्होंने कहा कि कश्मीर से शेष भारत को जोड़ने के लिए परियोजना पर परीक्षण आदि का काम पूरा हो चुका है और अगले चार महीने में इस पर रेलगाड़ी चलने लगेगी।

    उन्होंने कहा कि देश के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि होगी और कश्मीर से कन्याकुमारी को जोड़ने का सपना पूरा होगा।

    वैष्णव ने कहा कि चिनाब रेलवे पुल 359 मीटर ऊंचा है और यदि एफिल टॉवर से इसकी तुलना करें तो यह उससे 35 मीटर ऊंचा है।

    उन्होंने कहा कि देश में 1,300 स्टेशनों का पुनर्निर्माण का कार्य चल रहा है जो दुनिया में रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास का बहुत बड़ा काम है।

    उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी ने हम सब (मंत्रियों) को स्पष्ट रूप से कहा है कि तीसरे कार्यकाल में तीन गुना अधिक मेहनत करनी है। हम विकसित भारत के लक्ष्य को लेकर चले हैं, उसे पूरा करने के लिए अथक मेहनत करेंगे।’’

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