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    Home » दुकानदार सर्दी-खांसी की दवा देने से कतरा रहे, 150 रुपए की दवा के लिए डॉक्टर का शुल्क 300 रुपए तक
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    दुकानदार सर्दी-खांसी की दवा देने से कतरा रहे, 150 रुपए की दवा के लिए डॉक्टर का शुल्क 300 रुपए तक

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarOctober 12, 2025No Comments4 Mins Read
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    दुकानदार सर्दी-खांसी की दवा देने से कतरा रहे, 150 रुपए की दवा के लिए डॉक्टर का शुल्क 300 रुपए तक

    डॉक्टर के पर्ची के बिना नहीं मिल रहा सर्दी खांसी की दवा

    राष्ट्र संवाद ब्यूरो कमाल अहमद

    कोरबा:- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्वास्थ्य विभाग के मौखिक आदेश का हवाला देकर शहर के बड़े दवा दुकानदारों ने डॉक्टरी सलाह के बिना युवा या बुजुर्गों को सर्दी खांसी की दवाइयाें की बिक्री रोक दी है। इससे मरीज परेशान हैं। दवा दुकानों में उनकी तीखी बहस हो रही है।

     

    सर्दी-खांसी की दवा नहीं दे रहे दुकानदार

    मध्यप्रदेश और राजस्थान में जहरीली सिरप पीने से बच्चों की हुई मौत के बाद केन्द्र सरकार ने एक एडवाइजरी जारी करते हुए बिना डॉक्टरी सलाह दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को खांसी सिरप या सर्दी-जुकाम की दवाइयाें की ब्रिकी पर रोक लगा दिया है। इसका हवाला देकर कोरबा के स्वास्थ्य विभाग ने ड्रग कंट्रोलर के जरिए एक और मौखिक आदेश जारी किया है।

     

    इसमें दवा दुकानदारों से कहा गया है कि वे सर्दी खांसी की दवाइयां किसी भी उम्र के लोगों को डॉक्टरी सलाह के बिना नहीं बेचें। स्वास्थ्य विभाग के इस फरमान से वे लोग काफी परेशान हैं, जिन्हें हल्दी सर्दी-खांसी है। स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई को एक तरफा और सर्दी खांसी जैसी बीमारी के विपरित मान रहे हैं। इधर दुकानदारों का कहना है कि भारत में ऐसा कोई लिखित नियम नहीं है जिसमें सर्दी-खांसी की दवाईयां बिना डॉक्टरी सलाह देने पर रोक हो।

     

    सीएमएचओ डॉ. एसएन केसरी ने कहा की दो साल उम्र से आयु के बच्चों को बिना डॉक्टरी सलाह सर्री खांसी की गोली या सिरप देने पर रोक लगाई गई है। दवा दुकानदारों से कहा गया है कि वे किसी भी उम्र के लोगों को डॉक्टरी पर्ची देखे बिना सर्दी खांसी की दवाइयां न बेचे। अभी तक ये दवाइयां बिक रही थी। इसमें सुधार किया जा रहा है। जगह- जगह सरकारी अस्पताल है, लोगों को जाकर दवा लिखवानी चाहिए।

     

    करीब 150 रुपए की दवा के लिए डॉक्टरों का परामर्श शुल्क 300 रुपए तक

    कोरबा या अन्य उपनगरीय क्षेत्रों में सर्दी खांसी जैसी मौसमी बीमारियों को ठीक करने के लिए लोग पहले दवा दुकानों में पहुंचकर अपने से दवा खरीदते हैं। इन दवाइयों से अक्सर उनकी सर्दी खांसी ठीक हो जाती है। उनका कहना है कि बाजार से 100 से 150 रुपए की दवा लेकर ठीक हो जाते हैं। कई बार स्वयं से खरीदी गई दवा से जब ठीक नहीं होते तो निजी डॉक्टरों से क्लीनिक या अस्पताल में संपर्क करते हैं।

     

    डॉक्टर मरीज की लक्षण के आधार पर दवाइयां लिखते हैं। अगर बिना किए जांच दवा लिखते हैं, तो यह दवा 100 से 200 रुपए तक मिल जाती है। अभी कोरबा में अधिकांश डॉक्टरों की परामर्श शुल्क 300 से भी अधिक है। गरीब मरीजों के लिए यहीं चिंता का कारण है। जितने की दवा नहीं है, उससे अधिक डॉक्टरों का परामर्श शुल्क हो रहा है।डॉक्टर मरीज की लक्षण के आधार पर दवाइयां लिखते हैं। अगर बिना किए जांच दवा लिखते हैं, तो यह दवा 100 से 200 रुपए तक मिल जाती है। अभी कोरबा में अधिकांश डॉक्टरों की परामर्श शुल्क 300 से भी अधिक है। गरीब मरीजों के लिए यहीं चिंता का कारण है। जितने की दवा नहीं है, उससे अधिक डॉक्टरों का परामर्श शुल्क हो रहा है।

     

    सरकारी डॉक्टर और दवा पर मरीजों का भरोसा कम

    कोरबा में निजी क्लीनिक और अस्पतालों के अलावा कई सरकारी अस्पताल भी हैं। लेकिन सरकारी दवा और डॉक्टरों पर मरीजों का उतना भरोसा नहीं है, जितना निजी प्रेक्टिस करने वालों डॉक्टरों पर।

     

    मेडजोन कोरबा स्टोर प्रभारी अमित पॉल ने कहा की सीएमएचओ कार्यालय के आदेश के तहत डॉक्टर की सलाह के बिना सर्दी-खांसी की दवाइयां नहीं दी जा रही है। हालांकि यह आदेश मौखिक है। इस संबंध में कोई लिखित आदेश नहीं मिला है।

    150 रुपए की दवा के लिए डॉक्टर का शुल्क 300 रुपए तक दुकानदार सर्दी-खांसी की दवा देने से कतरा रहे
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