साठा वाली दुर्गा मैया के माथे से नवमी के दिन गिरते हैं फूल
राष्ट्र संवाद संवाददाता
मंसूरचक/ बेगूसराय
मंसूरचक.प्रखंड मुख्यालय से महज चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित साठा गाँव मां वैष्णवी दुर्गा मंदिर श्रद्धा और आस्था का केंद्र है.यहां हर वर्ष शारदीय नवरात्र पर माता दुर्गा की पूजा-अर्चना मिथिला पद्धति से होती है.मंदिर के नियमित पुजारी पंडित हरिश्चंद्र झा के अनुसार,यहां की पूजा की सबसे बड़ी विशेषता नवमी की रात होती है.इस दौरान माता की प्रतिमा के माथे पर फूल खोंस कर विशेष पूजा आराधना की जाती है.श्रद्धालुओं की मान्यता है कि जब माता प्रसन्न होती है,तो वह फूल अपने आप गिर जाता है.और इसे भक्त सबसे बड़ा प्रसाद मानते हैं.अनोखी परंपरा के बाद महिलाओं द्वारा खोइछा भरा जाता है.उक्त मौके पर शशि भूषण पोद्दार,अजीत झा,हरेराम चौधरी,धर्मेंद्र चौधरी,प्रभु पोद्दार,लक्ष्मी पोद्दार,विजय झा,नरेश दास, संदीप कुमार,नीरज झा, ललन कुमार,सहित अन्य श्रद्धालु सक्रिय रहते हैं.

