संस्कार शिक्षा निकेतन तेघड़ा में विजयदशमी महोत्सव
बेगूसराय/ राष्ट्र संवाद ब्यूरो
सुसंस्कार शिक्षा निकेतन का आंगन भक्ति, शक्ति और संस्कार से गूंज उठा। दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर जब नन्हे बच्चों ने मंच संभाला तो ऐसा लगा मानो साक्षात दुर्गा माँ विद्यालय में पधारी हों।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ के चरणों में दीप प्रज्वलित कर किया गया। फिर बच्चों की प्रस्तुति ने सबका मन मोह लिया।
विद्यालय के निदेशक डॉ. रणधीर कुमार ने अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में कहा कि
> बच्चों, याद रखना – माँ दुर्गा ने हमें सिखाया है कि नारी अबला नहीं, सबला है। अन्याय चाहे कितना भी बड़ा हो, अगर तुम्हारे अंदर आत्मविश्वास है तो तुम हर महिषासुर को हरा सकते हो। आज की ये नन्ही दुर्गा ही कल की डॉक्टर, शिक्षिका, वैज्ञानिक और इस देश की शक्ति बनेगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का अर्थ सिर्फ किताब पढ़ना नहीं, बल्कि संस्कारवान बनना है।
पूरे कार्यक्रम को ऊर्जा और जोश से भरने का काम किया मंच संचालक मंजेश कुमार ने किया। उनके एक-एक शब्द ने बच्चों में नया उत्साह भर दिया।
सच में, आज सुसंस्कार शिक्षा निकेतन ने सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं किया, बल्कि यह संदेश दिया है कि –
जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं संस्कार पलते हैं और वहीं देवता बसते हैं।
माँ दुर्गा सभी बच्चों के जीवन में ज्ञान, शक्ति और सफलता का आशीर्वाद बनाए रखें।

