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    रक्षाबंधन पर मिसाल बनी भाई-बहन की जोड़ी, धर्म की दीवार से परे भाईचारे का संदेश

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 29, 2026No Comments4 Mins Read
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    रक्षाबंधन पर मिसाल बनी भाई-बहन की जोड़ी
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    रक्षाबंधन पर मिसाल बनी भाई-बहन की जोड़ी ने जमशेदपुर में सामाजिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश की। इस अवसर पर पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के जिला उपाध्यक्ष अंसार खान को न्यू केबल टाउन निवासी एवं गोलमुरी मंडल अंतरराष्ट्रीय वीरांगना फाउंडेशन की अध्यक्ष चित्रलेखा तथा कांग्रेस जिला सचिव सह सोनारी मंडल प्रभारी शिल्पी चक्रवर्ती ने राखी बांधी। इस अवसर पर भाई-बहन के स्नेह के साथ सामाजिक एकता और सौहार्द का संदेश दिया गया।

    रक्षाबंधन पर मिसाल बनी भाई-बहन की जोड़ी

    रक्षाबंधन के अवसर पर पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी के जिला उपाध्यक्ष अंसार खान को न्यू केबल टाउन निवासी एवं गोलमुरी मंडल अंतरराष्ट्रीय वीरांगना फाउंडेशन की अध्यक्ष चित्रलेखा तथा कांग्रेस जिला सचिव सह सोनारी मंडल प्रभारी शिल्पी चक्रवर्ती ने राखी बांधी। इस अवसर पर भाई-बहन के स्नेह के साथ सामाजिक एकता और सौहार्द का संदेश दिया गया।

    अंसार खान ने कहा कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम और रक्षा के संकल्प का पर्व नहीं, बल्कि नारी सम्मान, आपसी विश्वास और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। राखी का धागा हमें समाज की हर बहन-बेटी के सम्मान और अधिकार की रक्षा का संकल्प लेने की सीख देता है। उन्होंने सभी देशवासियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं।

    यह आयोजन जमशेदपुर के गोलमुरी क्षेत्र में स्थित न्यू केबल टाउन के सामुदायिक भवन में संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में स्थानीय नागरिकों के अलावा कांग्रेस पार्टी के कई पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

    रक्षाबंधन का त्योहार पारंपरिक रूप से भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को समर्पित है, लेकिन इस आयोजन ने इसके दायरे को विस्तार देते हुए धर्म और जाति की सीमाओं से परे मानवीय संबंधों की मजबूती को रेखांकित किया।

    चित्रलेखा ने इस अवसर पर कहा कि राखी का धागा केवल रक्षा का प्रतीक नहीं, बल्कि यह दो दिलों को जोड़ने वाला एक अटूट बंधन है। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब समाज में विभाजन की रेखाएं खींची जा रही हैं, ऐसे में यह पहल एकता की नई इबारत लिखती है।

    शिल्पी चक्रवर्ती ने अपने संबोधन में महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का असली अर्थ तभी सार्थक होता है जब हम समाज की हर महिला को बहन का दर्जा देकर उसके अधिकारों की रक्षा का संकल्प लें।

    अंसार खान ने इस भावपूर्ण पहल के लिए दोनों बहनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह राखी उनके लिए केवल एक धागा नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व का एक ऐसा पत्र है जो उन्हें निरंतर जनसेवा और सद्भावना के लिए प्रेरित करेगा।

    जमशेदपुर, जिसे टाटा नगरी के नाम से भी जाना जाता है, हमेशा से सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल रहा है। यहां विभिन्न धर्मों के लोग मिलजुलकर त्योहार मनाते हैं। इस आयोजन ने एक बार फिर इस शहर की गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत किया है।

    रक्षाबंधन का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व भी कम नहीं है। इतिहास में ऐसे कई प्रसंग मिलते हैं जब राखी के धागे ने राजनीतिक गठजोड़ और सामाजिक एकता को मजबूत किया। रक्षाबंधन का इतिहास गवाह है कि मेवाड़ की रानी कर्णावती द्वारा हुमायूं को राखी भेजना इसका प्रसिद्ध उदाहरण है।

    आधुनिक दौर में भी यह पर्व अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। यह हमें याद दिलाता है कि रिश्ते खून के नहीं, बल्कि भावनाओं के होते हैं। अंसार खान, चित्रलेखा और शिल्पी चक्रवर्ती की यह तिकड़ी आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

    कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितजनों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की बधाई दी। इस अवसर पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता रामाश्रय प्रसाद, मोहन लाल अग्रवाल सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।

    इस प्रकार का आयोजन समाज में सकारात्मक संदेश देता है कि धर्म, जाति, पंथ से ऊपर उठकर मानवता ही सबसे बड़ा धर्म है। रक्षाबंधन पर मिसाल बनी भाई-बहन की जोड़ी ने यह साबित कर दिया कि स्नेह और विश्वास की डोर से हर दीवार को पार किया जा सकता है।

    अंसार खान भाईचारा रक्षाबंधन सामाजिक एकता
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