लेखक: मनीषा शर्मा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार असम में बाढ़ प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।
असम में बाढ़: ताजा स्थिति और राहत कार्य
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद भवन परिसर में असम के केंद्रीय मंत्रियों और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों से मुलाकात के बाद यह बात कही। इस साल अब तक, बाढ़ की वजह से राज्य में 68 लोगों की मौत हो चुकी है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘असम के सांसदों से मुलाकात की और राज्य के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की। केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की मदद के लिए असम सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। मैं सभी की सुरक्षा और कल्याण की कामना करता हूं।’’
पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्वानंद सोनोवाल तथा विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने भी इस बैठक में हिस्सा लिया।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के मुताबिक शिवसागर, गोलाघाट, चराइदेव, जोरहाट, नगांव और कामरूप (मेट्रोपॉलिटन) जिलों में कुल 4,45,495 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
एएसडीएमए के मुताबिक, बाढ़ पीड़ितों के लिए कुल 90 राहत शिविर संचालित किये जा रहे हैं और इनमें 28,695 लोगों ने आश्रय लिया है। इसके अलावा, 94 राहत वितरण केंद्र भी काम कर रहे हैं।
बुलेटिन के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और सिविल डिफेंस के जवानों समेत कई एजेंसियां बचाव और राहत कार्य में शामिल हैं तथा प्रभावित इलाकों में 67 नौकाएं तैनात की गई हैं।
एएसडीएमए के मुताबिक, बाढ़ की वजह से 37,139.52 हेक्टेयर में लगी फसल जलमग्न हो गई और 26,679 मवेशी बह गए।
अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार को बाढ़ की स्थिति में सुधार हुआ। उन्होंने बताया कि कई जिलों में जलस्तर घट रहा है।
अधिकारियों ने बताया कि एक केंद्रीय टीम ने बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए सर्वाधिक प्रभावित जिलों में से एक, शिवसागर का दौरा किया।
बाढ़ से निपटने की तैयारियां और चुनौतियां
असम में हर साल मानसून के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी और उसकी सहायक नदियों के उफान से भयावह बाढ़ आती है। इस साल भी लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर बह रहा है। राज्य सरकार ने पहले से ही एहतियाती कदम उठाए थे, लेकिन बारिश की तीव्रता ने सभी तैयारियों को चुनौती दी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण भी स्थिति पर नजर रखे हुए है।
राहत शिविरों में व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाएं
राहत शिविरों में ठहरे लोगों के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल और दवाओं की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए टीकाकरण और जागरूकता अभियान चला रही हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कृषि और पशुधन को भारी नुकसान
बाढ़ ने खरीफ की फसलों को तबाह कर दिया है। धान, जूट और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों को भारी आर्थिक क्षति हुई है। पशुधन की हानि से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा। सरकार ने फसल बीमा योजना के तहत दावों के त्वरित निपटारे का आश्वासन दिया है।
भविष्य के लिए बाढ़ प्रबंधन योजना
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बाढ़ की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ रही है। असम को दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन योजना की आवश्यकता है, जिसमें नदी तटबंधों का सुदृढ़ीकरण, जल निकासी तंत्र में सुधार और बाढ़ मैदानों का वैज्ञानिक प्रबंधन शामिल हो। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस दिशा में कार्य योजना तैयार कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने आश्वासन दिया है कि केंद्र की ओर से हरसंभव सहायता मुहैया कराई जाएगी। एनडीआरएफ की अतिरिक्त टीमें भेजी जा रही हैं। वायुसेना के हेलीकॉप्टरों से दूरदराज के इलाकों में राहत सामग्री गिराई जा रही है। स्थिति सामान्य होने तक राहत अभियान जारी रहेगा।

