बिरसानगर में सरकारी जमीन–तालाब पर भू-माफियाओं का संगठित कब्जा!करोड़ों की डील का खुलासा कौन है संरक्षणकर्ता
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। बिरसा नगर थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन और सरकारी तालाब को हड़पने के लिए भू-माफियाओं द्वारा करोड़ों रुपये के अवैध खेल का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि 1बी और 2 नंबर जोन के बीच स्थित नाबाद (सरकारी) जमीन को बेचने के लिए पूरा ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया था। इस पूरे खेल में प्रभावशाली संरक्षणकर्ताओं की भूमिका की चर्चा है, वहीं संसद के एक कथित प्रतिनिधि की संलिप्तता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
मामले की भनक लगते ही थाना प्रभारी और अंचलाधिकारी मनोज कुमार मौके पर पहुंचे और स्थल का मुआयना किया। इसी दौरान एक भू-माफिया अंचल कार्यालय में जमीन को अपनी बताते हुए दावा करता पाया गया। इस पर सीओ मनोज कुमार ने सख्त लहजे में कहा कि संबंधित पूरी जमीन नाबाद बिहार सरकार की है और उस पर किसी भी व्यक्ति का कोई वैध अधिकार नहीं बनता। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच जारी है। गणतंत्र दिवस के कारण कार्रवाई में कुछ नरमी जरूर रही, लेकिन प्रशासन ने कड़े कदम उठाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं।
जांच के दौरान सीओ को यह भी जानकारी मिली कि अंचल कार्यालय के बाहर कई भू-माफिया सक्रिय रूप से मौजूद थे। उन्होंने दो टूक कहा कि किसी भी सूरत में सरकारी जमीन और तालाब को अतिक्रमण से मुक्त कराया जाएगा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक स्थानीय नेता के घर के पास स्थित तालाब और आसपास की जमीन पहले भी विवादों में रही है। छठ घाट निर्माण के लिए तत्कालीन विधायक सरयू राय द्वारा 16वें वित्त आयोग के तहत फंड आवंटित कराया गया था, लेकिन आज तक न तो काम पूरा हुआ और न ही शिलापट्ट लगाया गया। आरोप है कि या तो निर्माण कार्य जानबूझकर रुकवा दिया गया या फिर आवंटित राशि की बंदरबांट कर ली गई।
स्थानीय निवासियों का यह भी आरोप है कि वन वीक ओम नगर में एक नेता के घर के सामने सड़क के बाईं ओर लगातार तालाब भरा जा रहा है। वहीं पीएम आवास निर्माण क्षेत्र तक, सड़क के दाहिने हिस्से और तारिणी रविदास के घर के पास अवैध रूप से जमीन बेची जा रही है, जहां प्रति प्लॉट करीब पांच लाख रुपये तक की वसूली की जा रही है। बताया जा रहा है कि एक भू-माफिया ने लगभग छह कट्ठा जमीन पर बाउंड्री भी करा ली है।
सूत्रों का कहना है कि जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस को अंधेरे में रखकर करोड़ों रुपये के इस अवैध खेल की साजिश रची गई। मामला अब सीओ और एसडीओ होते हुए उपायुक्त के संज्ञान में भी आ चुका है। हालांकि, पूरे प्रकरण में संरक्षण देने वालों की भूमिका अहम मानी जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि यदि कार्रवाई तेज होती है तो भू-माफिया किसी नई साजिश के साथ फिर सक्रिय हो सकते हैं।
फिलहाल प्रशासन की नजर पूरे मामले पर बनी हुई है और जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

“जांच में यह स्पष्ट है कि संबंधित पूरी जमीन नाबाद (सरकारी) बिहार सरकार की है। इस पर किसी भी व्यक्ति का कोई वैध दावा नहीं बनता। सरकारी जमीन और तालाब पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण या अवैध बिक्री किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।”
मनोज कुमार, अंचलाधिकारी (सीओ)

