बांग्ला भाषा को नई पहचान देने की पहल, रीना मंडल ने शुरू किया “माटिर आवाज़” अभियान
राष्ट्र संवाद संवाददाता धनबाद झारखंड
धनबाद। मातृभाषा बांग्ला को संरक्षित करने और समाज में उसकी पहचान को मजबूत करने के उद्देश्य से समाजसेवी रीना मंडल ने “माटिर आवाज़” नामक विशेष भाषा एवं सांस्कृतिक अभियान की शुरुआत की है। अंग्रेज़ी व अन्य भाषाओं के बढ़ते प्रभाव के बीच बांग्ला भाषा धीरे-धीरे युवाओं के संवाद और जीवनशैली से दूर होती जा रही है। इस बदलते माहौल में भाषा के प्रति जागरूकता फैलाने की आवश्यकता को महसूस करते हुए रीना मंडल ने यह कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि भाषा केवल बोलने का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, इतिहास और विरासत की आत्मा है। इस अभियान के तहत बच्चों और युवाओं में बांग्ला भाषा प्रेम जगाने के लिए कविता-पाठ, कहानी-वाचन, लोकगीत एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ आयोजित की जाएंगी, साथ ही साहित्यकारों और शिक्षकों के साथ संवाद कार्यक्रम भी होंगे। रीना मंडल घर-घर जाकर भी लोगों को मातृभाषा से जुड़े रहने और इसे नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए प्रेरित करने वाली हैं। स्थानीय लोगों ने इस पहल का गर्मजोशी से स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे बांग्ला भाषा को नई ऊर्जा, सम्मान और व्यापक पहचान मिलेगी। रीना मंडल ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ना अत्यंत ज़रूरी है और यह अभियान उसी दिशा में एक मजबूत कदम साबित होगा।

