झारखंड की लखपति दीदी पूनम देवी बनीं ग्रामीण महिलाओं की प्रेरणा
राष्ट्र संवाद सं
दुमका; आज ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) द्वारा आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) में *झारखंड के दुमका जिले की पूनम देवी* ने अपनी सफलता की कहानी साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने पशुपालन और उद्यमिता को अपनाकर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अन्य स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं को भी प्रेरित किया।
*पूनम देवी की प्रेरणादायक यात्रा*
पूनम देवी, जो आसनसोल गांव, दुमका सदर प्रखंड , जिला दुमका की निवासी हैं, JSLPS के तहत अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए मुर्गी पालन से जुड़ीं। उन्होंने 2020 से अब तक अपने हार्डनिंग सेंटर में 25 बैच में कुल 18,750 चूजों की पूरिंग की है।
हर वर्ष वह लगभग 5 – 6 चक्र में अपने हार्डनिंग सेंटर का संचालन करती हैं।
प्रत्येक चक्र में उन्हें अनुमानित 13 से 15 हजार रुपये की आय होती है।
अब तक उन्होंने 25 साइकिल चूजों की हार्डनिंग कर 1.71 लाख रुपये की आय अर्जित की है।
इसके अलावा, वह धान और सरसों की खेती भी करती हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त लाभ प्राप्त होता है।
*नया पॉल्ट्री फार्म और आगे की योजना*
अपनी सफलता को और आगे बढ़ाते हुए, पूनम देवी ने 3000 चूजों के पालन की क्षमता वाला एक नया पॉल्ट्री फार्म शुरू किया है।
वर्तमान में उनके पास BV-380 ब्रीड के 5000 चूजे हैं।
वह अपने कार्य का व्यवस्थित रिकॉर्ड रखती हैं और अन्य महिलाओं को भी यह सिखाती हैं।
उनके द्वारा प्रशिक्षित दीदियों ने भी मुर्गी पालन से अपनी आजीविका को सशक्त बनाया है।
गाँव की अन्य महिलाएँ उनसे चूजों के रखरखाव, वैक्सीनेशन, डीवॉर्मिंग और शेड निर्माण का प्रशिक्षण ले रही हैं।
*शुरुआती संघर्ष और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम*
शुरुआत में उन्हें समुदाय से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला, लेकिन जब उनके कार्य से अच्छी आय होने लगी, तो धीरे-धीरे समर्थन बढ़ता गया। इससे उनका आत्मविश्वास भी मजबूत हुआ और उन्हें यह एहसास हुआ कि वे बहुत कुछ कर सकती हैं।
*भविष्य की रणनीति*
अपने हार्डनिंग सेंटर का और विस्तार करेंगी।
अधिक आधुनिक सुविधाएँ जोड़कर चूजों की संख्या बढ़ाएँगी।
उन्नत ब्रॉयलर ब्रीड्स का पालन करेंगी।
दुमका जिले में मुर्गी पालन को और अधिक बढ़ावा देंगी, जिससे अन्य दीदियों को भी इस व्यवसाय में अवसर मिले।