सलीना अब जिले की पहली मुस्लिम महिला अधिवक्ता बन गई हैं।
सलीना खातून ने अखिल भारतीय बार परीक्षा में सफलता का परचम लहराया, गांव और मुस्लिम समाज का नाम किया रोशन
सद्दाम हुसैन
संवाददाता/जामताड़ा
अखिल भारतीय बार परीक्षा के परिणाम में जामताड़ा प्रखंड के बाँधपाड़ा गांव की सलीना खातून ने अपनी मेहनत, लगन और समर्पण का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए सफलता प्राप्त की है। धनबाद लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री हासिल करने वाली सलीना ने न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया है, बल्कि मुस्लिम समाज और जिले को भी गौरवान्वित किया है। शुक्रवार शाम को घोषित हुए परीक्षा परिणाम ने सलीना को जामताड़ा के एक प्रेरणादायक चेहरा के रूप में पहचान दिलाई है।सलीना खातून एक गाड़ी मैकेनिक की बेटी हैं। उनके पिता मोहम्मद मुख्तार और परिवार ने उनकी पढ़ाई और सपनों को साकार करने के लिए हर संभव प्रयास किया। पिता ने गाड़ी मैकेनिक का कार्य करते हुए कठिन परिस्थितियों में भी अपनी बेटी को वकील बनाने के उसके सपने को पूरा करने में साथ दिया। सलीना की मां ने भी परिवार और बेटी के इस सपने को अपना सबसे बड़ा लक्ष्य माना। सलीना ने शुरू से ही शिक्षा में अपनी रुचि और लगन दिखाई। 12वीं कक्षा से लेकर लॉ की डिग्री पूरी करने तक, उन्होंने हमेशा फर्स्ट डिवीजन के साथ सफलता हासिल की। उनके परिवार ने इस सफर में जो कठिनाइयां झेली, वह आज उनकी सफलता की कहानी को और भी प्रेरणादायक बनाती है।मुस्लिम समाज से आने वाली सलीना खातून ने अपने संघर्ष और मेहनत से यह साबित कर दिया है कि सपनों को पूरा करने के लिए केवल आत्मविश्वास और समर्पण की आवश्यकता होती है। उनके दादा एक मामूली किसान थे, और उनका परिवार आर्थिक रूप से मध्यमवर्गीय श्रेणी में आता है। ऐसे परिवार में रहकर वकील बनने का सपना पूरा करना आसान नहीं था, लेकिन सलीना की मेहनत और माता-पिता के समर्थन ने इसे संभव बना दिया। सलीना ने बताया कि वकील बनने का सपना उन्होंने बचपन में ही देखा था। अपने सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की। जामताड़ा व्यवहार न्यायालय में अधिवक्ता विधान चंद्र मंडल और अधिवक्ता जाकिर अंसारी की निगरानी में डेढ़ साल से प्रैक्टिस कर रही सलीना अब जिले की पहली मुस्लिम महिला अधिवक्ता बन गई हैं। सलीना की सफलता न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे मुस्लिम समाज के लिए गर्व का विषय है। उनकी यह उपलब्धि उन महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपने सपनों को पूरा करने की चाह रखती हैं। यह दिखाता है कि मेहनत और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। सलीना ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, दादा-दादी और परिवार के अन्य सदस्यों को दिया। उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल उनकी नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार और समाज की है। इस उपलब्धि ने जामताड़ा में महिलाओं की शिक्षा और आत्मनिर्भरता को लेकर एक नई उम्मीद जगाई है। सलीना की कहानी यह दर्शाती है कि महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अपनी जगह बना सकती हैं और समाज को आगे बढ़ा सकती हैं।अधिवक्ता सलीना खातून की यह प्रेरणादायक यात्रा समाज में बदलाव लाने का एक उदाहरण बन गई है। उनकी यह उपलब्धि दिखाती है कि शिक्षा, मेहनत और समर्पण से हर कठिनाई को पार किया जा सकता है।