लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर के आदित्यपुर क्षेत्र में साहित्य और संस्कृति की एक अद्भुत लहर देखने को मिली, जब मंगलम सिटी में सजा काव्य मंच। इस आयोजन ने न केवल स्थानीय निवासियों को बल्कि दूर-दराज से आए साहित्य प्रेमियों को भी एक सूत्र में पिरो दिया। मंगलम दुर्गा पूजा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का नाम ‘सप्तमी पूजा, सात कवि और सात रंग’ रखा गया था, जो वास्तव में काव्य जगत के विभिन्न रंगों का एक संगम साबित हुआ।
इस साहित्यिक संध्या में भक्ति, हास्य, ओज और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी कविताओं का ऐसा प्रवाह था कि सैकड़ों साहित्यप्रेमी मंत्रमुग्ध हो गए। कार्यक्रम की शुरुआत मां दुर्गा की आराधना और स्वागत संबोधन से हुई, जिसके बाद कवियों ने एक-एक कर मंच संभाला। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ-साथ साहित्य और संस्कृति के समन्वय को बढ़ावा देना था, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।
मंगलम सिटी में सजा काव्य मंच और अजय मुस्कान की पुस्तक का लोकार्पण
इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा आकर्षण चर्चित लेखक एवं कवि अजय मुस्कान की नई पुस्तक ‘सपना जो स्टेयरिंग पर सवार हुआ’ का लोकार्पण रहा। यह पुस्तक केवल शब्दों का संग्रह नहीं, बल्कि एक अनुभव है। इस पुस्तक का लोकार्पण अजय मुस्कान के पिता जटा शंकर मिश्र, माता भगवती मिश्र तथा उनकी धर्मपत्नी प्रीति मिश्रा ने संयुक्त रूप से किया।
यह पुस्तक बीएफसी पब्लिकेशन्स द्वारा प्रकाशित की गई है और लेखक की अखिल भारतीय रोड ट्रिप के वास्तविक अनुभवों पर आधारित एक यात्रा-वृत्तांत है। इसमें भारत की भौगोलिक विविधता, सांस्कृतिक richness, मानवीय संबंधों की गहराई और आत्मचिंतन को बहुत ही खूबसूरती से शब्दबद्ध किया गया है। यदि आप यात्राओं के शौकीन हैं, तो आप इस पुस्तक को अमेजन, फ्लिपकार्ट या किंडल पर प्राप्त कर सकते हैं।
कवि सम्मेलन के मुख्य आकर्षण और प्रतिभागी
मंच पर जब कवियों ने अपनी रचनाएं पेश कीं, तो माहौल पूरी तरह काव्यमय हो गया। सम्मेलन में मनीष बंदन, अजय मुस्कान, रजनी सिंह, सर्वानन्द सिंह ‘पथिक’, सुदीप्ता राउत, उपासना सिन्हा और श्यामल सुमन जैसे प्रख्यात कवियों ने शिरकत की। प्रत्येक कवि ने अपनी विशिष्ट शैली में श्रोताओं का मनोरंजन किया और उन्हें सोचने पर मजबूर किया।
अजय मुस्कान की कुछ पंक्तियाँ ‘जहाँ जैसा मिले, ख़ुद को वहाँ वैसा बनाता हूँ, तुम आओ तो बताऊँ ये कि मैं क्या-क्या बनाता हूँ’ ने श्रोताओं के बीच विशेष उत्साह पैदा किया और जोरदार तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराही गईं। इसके साथ ही, नवोदित कवि शशांक रश्मि ने भी अपनी काव्य-पाठ कला का प्रदर्शन किया और वरिष्ठ कवियों के साथ मंच साझा कर सराहना प्राप्त की।
कार्यक्रम के अंत में सभी आमंत्रित कवियों को सम्मान देने की परंपरा का पालन किया गया। उन्हें मां की चुनरी ओढ़ाकर और स्मृति-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया, जो भारतीय संस्कृति में सम्मान का प्रतीक माना जाता है।
आयोजन समिति और प्रबंधन
इस भव्य कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन आलोक कुमार ‘बंटी’ ने किया, जिन्होंने अपनी वाकपटुता से कार्यक्रम में निरंतर ऊर्जा बनाए रखी। वहीं, सम्मेलन का संयोजन एवं काव्य-पाठ के संचालन की जिम्मेदारी वरिष्ठ कवि रजनीश सिंह ने निभाई।
इस मौके पर मंगलम पूजा समिति के अध्यक्ष रजनीश सिंह, महासचिव मिथिलेश सिंह, कोषाध्यक्ष कृष्णानंद मिश्रा, पंकज अक्षय, पंडित शिव कुमार शर्मा सहित समिति के कई समर्पित सदस्य और मंगलम परिवार के निवासी उपस्थित रहे। इन सभी के सामूहिक प्रयासों से ही यह आयोजन सफल हो सका।
समापन सत्र में आलोक कुमार ‘बंटी’ ने सभी अतिथियों, कवियों और साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में सकारात्मकता लाते हैं और कला के प्रति प्रेम जागृत करते हैं। इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि आज के डिजिटल युग में भी काव्य और साहित्य की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है, बल्कि लोग आज भी शब्दों की गहराई और भावनाओं के जुड़ाव को महत्व देते हैं।

