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    झारखंड में तेज़ हुआ पंचायत सचिवों की मांगें का आंदोलन: जानें क्यों सड़कों पर उतरे कर्मचारी

    Sumi BangabashBy Sumi BangabashJuly 8, 2026Updated:July 8, 2026No Comments4 Mins Read
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    जमशेदपुर: झारखंड राज्य पंचायत सचिव संघ के बैनर तले एक बार फिर जोरदार प्रदर्शन करते हुए पंचायत सचिवों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर उपायुक्त कार्यालय का घेराव किया। यह प्रदर्शन राज्य सरकार की कथित उदासीनता के खिलाफ था, जिसने कई चरणों के आंदोलन के बावजूद आज तक पंचायत सचिवों का ग्रेड पे 2400 रुपये निर्धारित नहीं किया है। अपनी वर्षों पुरानी पंचायत सचिवों की मांगें को लेकर ये कर्मचारी अब आर-पार की लड़ाई के मूड में दिख रहे हैं।

    राष्ट्र संवाद संवादाता की रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत सचिवों ने स्पष्ट किया कि वे ग्रामीण विकास और पंचायत व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का निष्पादन करते हैं, लेकिन उनके वेतन और सेवा शर्तों के प्रति सरकार का रवैया बेहद निराशाजनक है। संघ के प्रतिनिधियों ने याद दिलाया कि वर्ष 2019 के राज्य सम्मेलन में भी समाहरणालय कर्मियों की तर्ज पर कालबद्ध उच्चतर ग्रेड पे की मांग उठाई गई थी, जिसे आज तक लागू नहीं किया गया है। यह अनदेखी पंचायत सचिवों में गहरा असंतोष पैदा कर रही है।

    पंचायत सचिवों की मांगें: क्यों और क्या चाहते हैं कर्मचारी?

    पंचायत सचिव संघ का कहना है कि वे राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में शासन की रीढ़ हैं। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर मनरेगा और विभिन्न सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने तक, हर कार्य में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके बावजूद उन्हें उनके हक से वंचित रखा जा रहा है। उनकी मुख्य मांगें केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सेवा शर्तों और पदोन्नति से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी शामिल हैं।

    ग्रेड पे और कैडर पुनर्गठन की प्रमुख मांग

    संघ ने अपनी मांगों में सबसे पहले पंचायत सचिवों का मूल ग्रेड पे 2400 रुपये निर्धारित करने की बात कही है। इसके अलावा, उन्होंने समाहरणालय कर्मियों की तर्ज पर पदों के पुनर्गठन की मांग की है। इस पुनर्गठन के तहत, निम्नलिखित पद और उनके अनुरूप ग्रेड पे निर्धारित करने की बात की गई है:

    • कनीय पंचायत सचिव: 2400 रुपये
    • उच्च वर्गीय पंचायत सचिव: 2800 रुपये
    • वरीय पंचायत सचिव: 4200 रुपये
    • प्रधान पंचायत सचिव: 4600 रुपये
    • पंचायत सचिव अधीक्षक: 4800 रुपये

    यह मांग केवल वेतन वृद्धि नहीं, बल्कि एक सम्मानजनक करियर पथ और बेहतर सेवा शर्तों की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    अन्य महत्वपूर्ण मांगें और समस्याएं

    ग्रेड पे और कैडर पुनर्गठन के अलावा, पंचायत सचिवों ने कई अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया है:

    • प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी (BPRO) के पद: संघ ने मांग की है कि BPRO के 50 प्रतिशत पदों पर वरीयता के आधार पर पंचायत सचिवों को प्रोन्नति दी जाए। यह उनके करियर में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगा।
    • पंचायत सचिवालयों में कर्मचारियों की नियुक्ति: सभी पंचायत सचिवालयों में कंप्यूटर ऑपरेटर, अनुसेवक (चपरासी) एवं रात्रि प्रहरी की नियुक्ति की जाए, ताकि कार्यभार कम हो और कामकाज सुचारु रूप से चल सके।
    • मनरेगा और रोजगार सेवक प्रभार से मुक्ति: पंचायत सचिवों को मनरेगा कार्यों के प्रभार से मुक्त किया जाए और रोजगार सेवक का अतिरिक्त प्रभार भी समाप्त किया जाए। इससे वे अपने मूल कर्तव्यों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाएंगे।

    व्यक्तिगत और प्रशासनिक अधिकारों का मुद्दा

    प्रदर्शन के दौरान, पंचायत सचिवों ने अपने व्यक्तिगत और प्रशासनिक अधिकारों से जुड़ी कुछ और अहम मांगें भी उठाईं। इनमें गृह जिला में पदस्थापन, लंबित सेवा संपुष्टि, एसीपी (Assured Career Progression) और एमएसीपी (Modified Assured Career Progression) का समय पर निष्पादन शामिल है। इसके साथ ही, समय पर प्रोन्नति, जिला पंचायत राज पदाधिकारी के अधीन स्थापना, विभिन्न विभागीय कार्यों के लिए यात्रा भत्ता देने तथा स्थानांतरण और सेवा पुस्तिका संबंधी अधिकारों में आवश्यक संशोधन की मांग भी रखी गई। ये सभी मांगें उनके कार्यस्थल पर सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

    ग्रामीण विकास में पंचायत सचिवों की भूमिका को समझने के लिए, आप झारखंड ग्रामीण विकास विभाग की वेबसाइट पर जा सकते हैं, जहां उनकी जिम्मेदारियों और सरकार की नीतियों के बारे में जानकारी उपलब्ध है।

    सरकार को चेतावनी और भविष्य की रणनीति

    प्रदर्शन के बाद, संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से राज्य सरकार के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें सभी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की गई। संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे अपने आंदोलन को और भी तेज करेंगे। पंचायत सचिवों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी समस्याओं को सरकार के सामने रखते आए हैं, लेकिन जब उनकी सुनवाई नहीं होती, तो सड़कों पर उतरना उनकी मजबूरी बन जाती है। यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस बार इन महत्वपूर्ण पंचायत सचिवों की मांगें पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या इन कर्मचारियों को उनका जायज हक मिल पाएगा।

    ग्रेड पे झारखंड समाचार पंचायत सचिव आंदोलन सरकारी कर्मचारी
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