दहेज प्रथा समाप्त करने के लिए 4 जिलों में चलाया जाएगा अभियान
जामताड़ा: दहेज प्रथा उन्मूलन हेतु क्षेत्रीय स्तर पर एक अभियान चलाया जाएगा जिसमें मुख्य रुप से जामताड़ा,देवघर,गिरीडीह और धनबाद जिला के समाजसेवी, बुद्धिजीवी, शिक्षाविद एवं आंदोलनकारी अपने -अपने जिला में योजना तैयार करेंगे और उसी के अनुरूप दहेज प्रथा उन्मूलन हेतु कार्य किया जाएगा। उक्त बातें शिक्षाविद एवं जन आंदोलनकारी गाजी रहमतुल्लाह रहमत ने कही। उन्होंने कहा कि इन चारों जिलों में अन्य कुप्रथाओं की तरह दहेज जैसी कुप्रथा चरम पर है जिससे समाज का ताना-बाना बिगड़ रहा है तथा गरीब एवं बेबस बाप को ना चाहते हुए भी अपनी गाढ़ी कमाई को बेटी की शादी में झोंक देना पड़ता है| फिर भी दहेज लोभी बेटे और उसके बाप की मांगें पूरी नहीं हो पाती हैं । अंततः उसे अपनी बपौती जमीन को महाजनों के हाथों या तो गिरवी रखनी पड़ती है या हमेशा के लिए बेच देनी पड़ती है। दहेज लोभी समाज ने ना जाने कितनी बेटियों को आत्महत्या के लिए मजबूर कर दिया है। गाजी रहमत ने कहा कि आए दिन बहुओं को जलाकर मार डालने अथवा उन्हें आत्महत्या पर मजबूर करने का समाचार अक्सर सुनने को मिलता है । इसका जिम्मेवार कोई और नहीं बल्कि हमारा दहेज पिशाची समाज ही है|हमें समाज के हर वर्ग के बीच जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है ताकि समाज के सभी लोगों को जागृत एवं जागरूक किया जा सके और दहेज लोभी तथा अर्थ पिशाची समाज में व्याप्त दहेज प्रथा जैसी बुराई को जड़ मूल समाप्त किया जा सके । वहीं जु़म ऐप के जरिए से अपनी विचार व्यक्त करते हुए शेख अब्दुल सलाम मदनी ने कहा कि अगर समाज के लोग इस कुप्रथा को खत्म नहीं करेंगे तो कानून का सहारा लिया जाएगा क्योंकि दहेज निषेध अधिनियम 1961 के अनुसार दहेज लेने, देने या इसके लेनदेन में सहयोग करने पर 5 वर्ष की कैद और ₹15000 के जुर्माने का प्रावधान है । उन्होंने कहा कि दहेज एक सामाजिक समस्या है जिसका उन्मूलन तभी हो सकता है जब हम संकल्प पूर्वक इसके विरुद्ध कदम उठाएंगे। उन्होंने कहा कि संपर्क अभियान जिला स्तर से लेकर ग्राम स्तर तक चलाया जाएगा और एक सूत्रीय मिशन के तहत समाज से दहेज जैसी कुप्रथा का समापन किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इस मुहिम को कामयाब बनाने के लिए तीन शिखर वार्ताएं कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से चारों जिले के विद्वत जनों के बीच हो चुकी हैं जिसमें मुख्य रूप से मौलाना नियमतुल्लाह उमरी ,मौलाना असगर अली सलफी ,मौलाना शौकत अली मौलाना ऐनुल हक फैजी ,मौलाना एहसान फैजी, तारिक अनवर मौलाना, इकबाल असरी ,मौलाना मोहम्मद कासिम नदवी ,मुफ्ती सईद आलम, मौलाना शहाबुद्दीन साकिब ,मोहम्मद फारुक, मौलाना महफूज ,अशरफ मिफ्ताही ,मौलाना इस्माइल राफई, मुफ्ती अब्बास कासमी ,हाफिज जाकिर नदवी मौलाना सद्दाम हुसैन मौलाना ,अब्दुल रकीब रहमानी, शेख जकरिया, अशरफ जामी ,सरफराज एवं अन्य मौजूद थे।

