रेल बजट के चर्चा में पूरे लय में दिखे जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो
राष्ट्र संवाद संवाददाता
सांसद बिद्युत बरण महतो ने रेल बजट पर हुए चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि भारतीय रेलवे के विकास के प्रति विषयों पर सबसे बड़े नेता प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी और रेल मंत्री की अपार मेहनत और दृष्टि की सराहना करने का अवसर प्रदान करने के लिए मैं आपके प्रति आभार प्रकट करना चाहता हूं।
सांसद ने कहा कि इस बजट में रेल के लिए कुल 2 लाख 62 हजार रुपये की धनराशि आबंटित की गई है, यह बजट वर्ष 2047 तक विकसित भारत को बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने वाला एक समावेशी बजट है।
सांसद ने चर्चा में कहा कल झारखंड के चक्रधरपुर डिविजन में रेल हादसा हुआ। किसी भी प्रकार की दुर्घटना का होना दुखद पहलू है। झारखंड में जो दुर्घटना हुई है, उसमें दो लोगों की जान चली गई है। दुर्घटना में मृत लोगों की मुआवजा देकर कीमत नहीं लगाई जा सकती है। मैं मृत लोगों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता हूं। रेलवे की दुर्घटनाएं कम हों, इसके लिए हमारी सरकार गंभीर है और प्रधान मंत्री जी और रेल मंत्री भारतीय रेल के विकास के लिए लगातार अभूतपूर्व काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिनको लोगों की मृत्यु पर राजनीति करने में मजा आता है, वह दुर्घटनाओं को भी राजनीतिक रंग देने की कोशिश करते हैं। सोशल मीडिया में रेल को बदनाम करने के लिए कुछ लोग काम कर रहे हैं, जिसे किसी भी कारण से सही नहीं ठहराया जा सकता है। आंकड़ों के अनुसार 2013-14 में 3699 डिरेलमेंट्स हुई। यानी हर दिन 10 से अधिक डिरेलमेंट्स हुई। इसके साथ-साथ 2023- 24 में हमारी सरकार के समय में डिरेलमेंट्स की संख्या घटकर लगभग 481 हुई।
अगर इसके बाद देखेंगे तो कांग्रेस सरकार के दौरान प्रतिदिन साढ़े दस डिरेलमेंट्स होते थे। वर्ष 2005 में ऐसी 234 रेल दुर्घटनाएं हुई। इसी तरह, वर्ष 2006 में दुर्घटनाओं की संख्या 195 हुई। वर्ष 2007 में यह 194 रही। इसके बाद वर्ष 2008 में 165 दुर्घटनाएं हुई।
सांसद श्री महतो ने कहा वर्ष 2018-19 में 55 रेल दुर्घटनाएं हुई जबकि वर्ष 2023 में मात्र 24 दुर्घटनाएं हुई। आज हम न सिर्फ ज्यादा से ज्यादा रेलगाड़ियों को चलाने पर ध्यान दे रहे है, बल्कि उनको मॉडर्न बनाने पर भी ध्यान दे रहे हैं। जमशेदपुर से बनारस के बीच एक ट्रेन चलाई जाए।
सांसद ने कहा कि इस वर्ष के बजट में झारखंड के लिए 7302 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2009 से 2014 के बीच में अगर देखा जाए तो तत्कालीन रेल मंत्री जी ने झारखंड के लिए 457 करोड़ रुपये आवंटित किए थे। इस तरह, आज झारखंड के लिए रेलवे आवंटन में 16 गुना वृद्धि हुई है।