जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल 20–21 दिसंबर को होटल रामाडा, बिस्टुपुर में ग़ज़ल, कविता, व्यंग्य और हिंदी की होगी धमाकेदार चर्चा
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर, 2 दिसंबर. जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल का दो दिवसीय आयोजन 20 और 21 दिसंबर को होटल रामाडा, बिस्टुपुर में होने जा रहा है. इस दौरान पत्रकारिता और चित्रकला पर विशेष कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी, जबकि दोनों संध्याओं में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आकर्षक आयोजन होगा. साहित्य, व्यंग्य, कविता, भाषाई विविधता और समसामयिक मीडिया पर कई महत्वपूर्ण सत्र होंगे, जिनमें देशभर के चर्चित साहित्यकार, कवि, कलाकार और बुद्धिजीवी अपने विचार साझा करेंगे. यह आयोजन छात्रों, शिक्षकों और साहित्य–रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए सीखने और संवाद का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा.
सरकारी गलियारों से OTT तक: हिंदी का बढ़ता प्रभाव
पहले दिन 20 दिसंबर को दोपहर 2:40 बजे “हिंदी का वैश्विक विस्तार और बढ़ती स्वीकार्यता” विषय पर चर्चा होगी. इस सत्र में साहित्य अकादेमी सम्मानित वरिष्ठ लेखक डॉ. दामोदर खड़से तथा कथाकार–कवयित्री एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी श्रीमती अंजू रंजन, IFS वक्ता के रूप में उपस्थित रहेंगी. इस चर्चा का संचालन पटना के शिक्षाविद और फिल्म समीक्षक डॉ. कुमार विमलेंदु सिंह करेंगे दिल्ली से अंजू रंजन और पुणे से दामोदर खड़से का आगमन इस सत्र को विशेष महत्व देता है.
व्यंग्य की धार : राजनीति, समाज और सच
उसी दिन व्यंग्य पर केंद्रित एक तीखा और विचार–प्रधान सत्र भी आयोजित होगा. देश के विख्यात व्यंग्यकार डॉ. प्रेम जनमजेय तथा एक्साइज कमिश्नर मुकेश नेमा इस सत्र के प्रमुख वक्ता होंगे. संचालन उज्जैन की शिक्षाविद पांखुरी ‘वक्त’ करेंगी. यह चर्चा इस दृष्टिकोण को रेखांकित करेगी कि व्यंग्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि सत्ता का आलोचक, समाज का आईना और विचारों की सबसे पैनी धार है.
जब लगेगा ग़ज़ल–कविता का तड़का, तब बनेगा माहौल
फेस्टिवल के दूसरे दिन ग़ज़ल और कविता का विशेष सत्र आयोजित होगा, जिसमें ग़ज़लकार मदन मोहन ‘दानिश’ (ग्वालियर) तथा युवा कवि अंबर पांडेय (इंदौर) अपने चयनित विचार और रचनाएँ प्रस्तुत करेंगे. इस सत्र का संचालन “रचियता” के संस्थापक पीयूष पुष्पम करेंगे.
बोलचाल की भाषा में कविता : हिन्दी, उर्दू, अंग्रेज़ी और अन्य भारतीय भाषाएँ
भाषाई विविधता को समर्पित इस विशेष सत्र में दिल्ली के साहित्यकार एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सौरभ तिवारी तथा प्रतिष्ठित शिक्षाविद प्रो. स्वाति पराशर वक्ता के रूप में भाग लेंगी. संचालन यायावर ऐप के संस्थापक वैभवमणि त्रिपाठी करेंगे. इस सत्र में यह विमर्श होगा कि आधुनिक कविता किस प्रकार बोलचाल, मिश्रित भाषाओं और नई अभिव्यक्ति–शैलियों से समृद्ध हो रही है.
यह आयोजन बनेगा मील का पत्थर – मंटू अग्रवाल
फेस्टिवल की आयोजन समिति की ओर से मंटू अग्रवाल ने बताया कि अतिथियों के स्वागत, आवागमन और आवास की सभी तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं. उन्होंने कहा कि यह आयोजन जमशेदपुर की साहित्यिक परंपरा में एक नया अध्याय जोड़ते हुए शहर की सांस्कृतिक धरा पर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा.


