Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » सामंजस्य के साथ जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद
    Breaking News Headlines ओड़िशा खबरें राज्य से जमशेदपुर जामताड़ा झारखंड रांची राजनीति राष्ट्रीय संपादकीय

    सामंजस्य के साथ जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद

    Devanand SinghBy Devanand SinghJune 27, 2024No Comments3 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    सामंजस्य के साथ जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद

    देवानंद सिंह

    पक्ष और विपक्ष की सियासी रणनीति के बीच आखिरकार, बुधवार को सत्ता पक्ष के उम्मीदवार ओम बिरला लोकसभा अध्‍यक्ष बन गए हैं। बिरला लगातार दूसरी बार अध्यक्ष बने हैं। सामान्‍यतया, लोकसभा अध्‍यक्ष सत्तारूढ़ दल का ही होता है और उपाध्यक्ष विपक्ष का होता है। इस बार भी ऐसा ही होने जा रहा है। वैसे इस बार भी लोकसभा अध्‍यक्ष का चुनाव सर्वसम्मति से हो सकता था, लेकिन सत्तापक्ष ने विपक्ष की यह मांग ठुकरा दी थी और उसने अपना कैंडिडेट खड़ा कर दिया था, लेकिन अब परंपरा के मुताबिक़ उपाध्‍यक्ष पर उसे दे दिया जाएगा, हालांकि संख्या बल के लिहाज से नवनिर्वाचित लोकसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के पास पर्याप्त बहुमत है, लिहाजा उसके उम्मीदवार की जीत तय थी। जीत के बाद बुधवार को बिरला ने अपना आसान भी ग्रहण कर लिया था। बता दें कि बिरला इस बार कोटा संसदीय सीट से चुनकर लोकसभा पहुंचे हैं। उन्होंने कांग्रेस के प्रहलाद गुंजल को चुनाव हराया। इससे पहले वे 2003 से 2014 तक कोटा नॉर्थ की विधानसभा से लगातार विधायक चुने गए थे।

     

     

    भले ही, ओम बिरला का संसदीय अनुभव लंबा ना हो, लेकिन वे 2003 से लेकर अब तक हर चुनाव जीतते आए हैं, जो अपने-आप में उनके सफल सियासी सफर को दर्शाता है। दरअसल, साल 2003 में उन्होंने कोटा से पहला विधानसभा चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्‍हें जीत मिली थी। इसके बाद 2008 में उन्होंने कोटा दक्षिण सीट से कांग्रेस के शांति धारीवाल को हराकर विधानसभा चुनाव जीता, जबकि तीसरा विधानसभा चुनाव भी उन्होंने कोटा दक्षिण से ही 2013 में जीता था।

     

     

    2014 में वह संसदीय चुनाव का हिस्‍सा बने, जब बीजेपी ने उन्‍हें कोटा संसदीय सीट से प्रत्याशी बनाया। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया, वहीं 2019 में बिरला फिर से सांसद चुने गए, तब उन्‍हें बीजेपी ने लोकसभा अध्‍यक्ष बनाकर सबको चौंका दिया था। उन्‍होंने लोकसभा को जिस ढंग से चलाया, उसकी सभी ने तारीफ की, जब उन्‍होंने इस बार भी लोकसभा चुनाव में जीत दर्ज की तो बीजेपी ने उन्‍हें एक बार फिर लोकसभा का अध्‍यक्ष का प्रत्‍याशी बनाया और बहुमत होने की वजह से वह जीत भी गए। संसद में हिन्दी भाषा के शब्दों को बढ़ावा देते हुए ओम बिरला ने ‘ऑनरेबल एमपी’ की बजाए ‘माननीय सदस्यगण’ बोलना शुरू किया।

     

     

    इसके साथ ही उन्होंने ‘मोशन’ को भी ‘प्रस्ताव’ में बदल दिया। वोटिंग के दौरान सांसदों के बीच ‘यस और नो’ करने की परंपरा दशकों से चली आ रही थी, लेकिन ओम बिरला ने इसे ‘हां और नहीं’ में तब्दील कर दिया। उन्होंने विपक्षी सदस्यों के सदन से निलंबन के मामले में भी इतिहास रचते हुए पूरे कार्यकाल में क़रीब 140 सदस्यों को अलग-अलग समय पर सदन से निलंबित किया।

    लगातार दूसरी बार लोकसभा अध्यक्ष बनने वाले ओम बिरला पांचवें नेता हैं। इससे पहले 1956 से 1962 तक एमए अय्यंगार, 1969 से 1975 तक जीएस ढिल्लों, 1980 से 1989 तक बलराम जाखड़, 1998 से 2002 तक जीएमसी बालयोगी लोकसभा अध्यक्ष रहे हैं, जिन्होंने लगातार दो लोकसभाओं की अध्यक्षता की है। नीलम संजीव रेड्डी भी ऐसे सांसद रहे हैं, जो दो बार लोकसभा अध्यक्ष रहे हैं, लेकिन वह लगातार अध्‍यक्ष नहीं रहे। उन्हें 1967 से 1969 तक और फिर मार्च 1977 से जुलाई 1977 तक लोकसभा अध्यक्ष चुना गया था।

    संविधान की व्‍यवस्‍था के अनुसार लोकसभा अध्यक्ष चाहे जिस भी दल का सदस्य चुना जाए, लेकिन माना जाता है कि चुने जाने के बाद उसकी दलीय संबद्धता औपचारिक तौर पर ख़त्म हो जाती है और वह दलीय गतिविधियों से अपने को दूर कर लेता है, उससे अपेक्षा की जाती है कि वह दलीय हितों और भावनाओं से ऊपर उठकर सदन की कार्यवाही का संचालन करते हुए विपक्षी सदस्यों के अधिकारों का भी पूरा संरक्षण करेगा। उम्मीद यही है कि ओम बिरला पिछले कार्यकाल की तरह अपने इस कार्यकाल को भी सामंजस्य के साथ निभाएंगे, जिससे देश की जनता की उम्मीदें पूरी हो पाएं।

    सामंजस्य के साथ जिम्मेदारी निभाने की उम्मीद
    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleराष्ट्र संवाद हेडलाइंस
    Next Article बारीडीह गुरुद्वारा में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने को उमड़ी संगत

    Related Posts

    पोटका विधानसभा को बचाने के लिए अब जनजागरण और जनआंदोलन की आवश्यकता है::दुखनी सोरेन

    July 2, 2026

    अंचल कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में कांग्रेस ने निकाला जन आक्रोश रैली, किया धरना प्रदर्शन

    July 2, 2026

    विद्या ज्योति स्कूल गम्हरिया में इंटर स्कूल भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

    July 2, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    पोटका विधानसभा को बचाने के लिए अब जनजागरण और जनआंदोलन की आवश्यकता है::दुखनी सोरेन

    अंचल कार्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में कांग्रेस ने निकाला जन आक्रोश रैली, किया धरना प्रदर्शन

    विद्या ज्योति स्कूल गम्हरिया में इंटर स्कूल भाषण प्रतियोगिता का आयोजन

    पहली बारिश में यूसील कॉलोनी में पानी भरा यूसील कॉलोनी के साफ सफाई नाली सफाई की पोल खुली ठेकेदार अधिकारियों के मिली भगत से यूसिल को लग रहा है चुना

    सीआरपीएफ ग्रुप केंद्र में हुआ ट्राय थनल कार्यक्रम

    सरायकेला-खरसावाँ में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई

    हिमांशु सिंह हत्याकांड और बढ़ते अपराध के विरोध में भाजपा का मशाल जुलूस, 3 जुलाई के जमशेदपुर बंद को सफल बनाने की अपील

    बढ़ते अपराध पर सिंहभूम चैंबर सख्त, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

    बोकारो के पेटरवार प्रखंड का प्रधान सहायक रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, ACB ने 8000 रुपए के साथ केमिकल लगे नोटों के साथ रंगे हाथ पकड़ा

    जमशेदपुर बंद आज: पुलिस हाई अलर्ट पर, शहरभर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.