राष्ट्र संवाद संवाददाता
यूसील जादूगोड़ा अस्पताल के सामने 35 लाख की लागत से बन रहा मुख्य गेट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। काम शुरू हुए 8 महीने बीत गए, लेकिन गेट आज भी अधूरा पड़ा है। अधूरे पिलर, निकली हुई सरिया और बिखरा मलबा अस्पताल आने वाले मरीजों के लिए जानलेवा बन गया है। रोजाना 4-5 लोग गिरकर घायल हो रहे हैं।
35 लाख खर्च, फिर भी गेट नहीं
यूसील प्रबंधन ने अस्पताल की सुरक्षा और सुंदरीकरण के लिए 35 लाख रुपये से मुख्य गेट बनाने का टेंडर दिया था। ठेकेदार ने 6 महीने में काम पूरा करने का दावा किया था। 8 महीने बाद हालत यह है कि सिर्फ अधूरे पिलर खड़े हैं। छत नहीं डाली गई। सरिया बाहर निकले हैं। गेट के पास ईंट, गिट्टी और ड्रम पड़े हैं।
मरीजों की जान से खिलवाड़
अस्पताल में रोज 200 से ज्यादा मरीज आते हैं। अधूरे गेट के पास न चेतावनी बोर्ड है, न बैरिकेडिंग। रात में अंधेरा होने से लोग सरिया से टकराकर गिर जाते हैं। पिछले एक हफ्ते में 12 से ज्यादा लोग घायल हो चुके हैं।
स्थानीय निवासी सुनील महतो ने बताया, “अस्पताल इलाज कराने आते हैं, यहां उल्टा चोट लग जाती है। बच्चे-बूढ़े सब गिर रहे हैं। यूसील प्रबंधन को दिखता नहीं क्या?”
काम बंद किए कई महीने हो गए। यूसील के सिविल विभाग ने भी आंखें मूंद ली हैं।
वही विस्थापित महिला आशा उरांव के द्वारा भी अपनी जमीन पर मुख्य गेट बनाए जाने को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यूसील सिर्फ यूरेनियम निकालना जानता है, जनता की सुरक्षा से कोई मतलब नही हे।

