चाईबासा में गजराज का तांडव, एक ही परिवार के पांच की मौत; सीरियल किलर बने दंतैल से थर्राया कोल्हान
राष्ट्र संवाद संवाददाता ( मृत्युंजय बर्मन)
झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले में जंगली हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा और बेहद हृदयविदारक घटना चाईबासा वन प्रमंडल के एक गांव की है, जहां बीती रात एक बेकाबू दंतैल हाथी ने एक ही परिवार के पांच सदस्यों को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया। इस दर्दनाक हादसे में पति-पत्नी और उनके तीन मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पूरा परिवार रात के समय अपने घर में गहरी नींद में सो रहा था। तभी देर रात जंगली हाथी गांव में घुस आया और मकान को रौंदते हुए सीधे घर के अंदर घुस गया। हाथी के तांडव से घर पूरी तरह ध्वस्त हो गया। ग्रामीणों ने बताया कि हाथी ने दीवारें तोड़ दीं और अंदर घुसकर सो रहे लोगों को कुचल दिया। चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण दौड़े, लेकिन तब तक सब कुछ खत्म हो चुका था।
एक हफ्ते में 15 मौतें, गांवों में दहशत
यह घटना चाईबासा जिले में पिछले एक सप्ताह के भीतर हाथियों के हमलों से हुई 15वीं मौत बताई जा रही है। वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि हाथियों का झुंड जंगल से निकलकर खेतों और गांवों की ओर आ गया है। फसलें नष्ट होने से भोजन की कमी झेल रहे हाथी आक्रामक हो गए हैं।
झुंड से बिछड़ा दंतैल बना काल
बताया जा रहा है कि झुंड से बिछड़े एक हिंसक दंतैल हाथी ने ही पूरे इलाके में आतंक मचा रखा है। इस हाथी ने अब तक चाईबासा वन प्रमंडल के गांवों में आठ लोगों की जान ले ली है। कोल्हान और सारंडा क्षेत्र से निकलकर यह हाथी हाटगमहरिया और नोवामुंडी के गांवों तक पहुंच चुका है।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हाथी के दो लंबे दांत हैं, यानी वह पूरी तरह विकसित टस्कर है। विशेषज्ञों का मानना है कि झुंड से अलग होने और हार्मोनल अवस्था (मस्ट स्टेट) में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ने से नर हाथी अत्यंत हिंसक हो जाता है, जिससे वह इंसानों पर जानलेवा हमले करता है।
विशेषज्ञ टीमें तैनात, ड्रोन से तलाश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हाथी को पकड़ने और ट्रांसलोकेट (स्थानांतरित) करने के लिए गुजरात से ‘वन तारा’ की विशेषज्ञ टीम बुलाई गई है। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल से आई टीम भी वन विभाग को सहायता दे रही है। हाथी की तलाश के लिए थर्मल सेंसर ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। पूरी रात वन विभाग की टीमें जंगलों और गांवों में हाथी को ट्रैक करने में जुटी रहीं।
मुआवजा घोषित, आक्रोशित ग्रामीण
जिलाधिकारी ने मृतकों के परिजनों को प्रति परिवार 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। हालांकि, ग्रामीणों का गुस्सा थमता नहीं दिख रहा। लोगों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए तत्काल और ठोस कदम उठाने की मांग की है।
इस पूरे घटनाक्रम ने न सिर्फ ग्रामीणों को, बल्कि सरकार और प्रशासन को भी बेबस कर दिया है। हालात ऐसे हैं मानो आम गरीब ग्रामीणों को एक पागल और हिंसक हाथी के रहमो-करम पर छोड़ दिया गया हो। फिलहाल, पश्चिमी सिंहभूम में गजराज का खौफ चरम पर है और हर रात लोगों के लिए एक नए खतरे का संकेत बनती जा रही

