संथाली भाषा की ओल चिकी लिपि को संसद में मान्यता मिलने पर पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने जताया आभार
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने संथाली भाषा की ओल चिकी लिपि को संसद में शामिल किए जाने पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त किया। जमशेदपुर के करनडीह पहुंचे चंपई सोरेन ने कहा कि यह पूरे झारखंडवासियों के लिए गर्व और सम्मान की बात है।

उन्होंने कहा कि जिस तरह अटल बिहारी वाजपेयी ने आदिवासियों को अलग राज्य का उपहार दिया था, उसी तरह वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदिवासियों के लिए अलग मंत्रालय देने के साथ-साथ संसद में संथाली भाषा की ओल चिकी लिपि को अन्य भाषाओं के साथ शामिल कर ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इसके अनुवाद के लिए भी प्रतिनियुक्ति हो गई है, जो गौरव का क्षण है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस पर लाल किला से दिए गए संबोधन में प्रधानमंत्री ने आदिवासी जमीनों पर अवैध कब्जा और घुसपैठियों द्वारा डेमोग्राफी बदलने के प्रयासों को गंभीर बताया तथा इस पर कड़े कदम उठाने की प्रतिबद्धता जताई। यह उनके आदिवासियों के हितों की रक्षा की गहरी भावना को दर्शाता है।

चंपई सोरेन ने कहा कि यह निर्णय संथाल समाज और पूरे राज्यवासियों के लिए ऐतिहासिक व सम्मानजनक है।


