वित्तीय बदलाव देश के नागरिकों और करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण
देवानंद सिंह
नए वित्तीय वर्ष का आगमन हर साल विभिन्न आर्थिक और वित्तीय बदलावों के साथ होता है। इस बार यानी 1 अप्रैल 2025 से लागू हुए बदलाव उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जो आयकर, बैंकिंग, पेंशन योजनाओं, यूपीआई भुगतान और अन्य वित्तीय क्षेत्र से जुड़े हैं। इस साल के केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई अहम घोषणाएं की थीं, जिनका सीधा असर लाखों नागरिकों, करदाताओं, बैंक ग्राहकों और यूपीआई उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा, हालांकि यह राहत देने वाला है। वित्त मंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार अब सालाना 12 लाख रुपए तक की आय वाले लोगों को कोई आयकर नहीं देना होगा। यही नहीं, नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन के रूप में 75,000 रुपए की छूट भी मिलेगी। इसका मतलब यह है कि अब वे लोग, जिनकी कुल आय 12.75 लाख रुपए तक है, उन्हें कोई आयकर नहीं देना होगा। इससे मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत मिलेगी, और वे अपनी बढ़ी हुई आय को निवेश, बचत या उपभोग में बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगे।
इसके अलावा, आयकर स्लैब में अन्य बदलाव भी किए गए हैं, जिनके चलते करदाताओं को टैक्स की दरों में भी बदलाव देखने को मिलेगा। यह बदलाव मुख्य रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद होगा, जिनकी आय 12 लाख रुपए से अधिक है, क्योंकि टैक्स की दरों में पुनरीक्षण किया गया है, जिससे उनकी कर देनदारी कम हो सकती है।
बैंकिंग सेक्टर में भी कई महत्वपूर्ण बदलाव होने जा रहे हैं। खासकर, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और केनरा बैंक जैसे बड़े बैंकों में न्यूनतम बैलेंस की आवश्यकता में बदलाव होगा। जिन खातों में न्यूनतम बैलेंस नहीं रहेगा, उन्हें दंडित किया जाएगा। यह दंड विभिन्न शहरों और इलाकों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। खासकर, शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में इसके असर को महसूस किया जाएगा। इस कदम का उद्देश्य बैंकों के संचालन को प्रभावी बनाना और उनके राजस्व को बढ़ाना है।
इसके अलावा, एक मई से एटीएम से पैसे निकालने पर शुल्क बढ़ जाएगा। रिजर्व बैंक द्वारा एटीएम इंटरचेंज शुल्क बढ़ाने की मंजूरी दिए जाने के बाद, हर महीने सीमित संख्या में मुफ्त निकासी के बाद ग्राहकों को अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा। विशेष रूप से, यदि ग्राहक किसी अन्य बैंक के एटीएम से पैसे निकालते हैं, तो उन्हें प्रति लेनदेन 20-25 रुपए का शुल्क चुकाना होगा। इससे एटीएम सेवा का उपयोग महंगा हो जाएगा और ग्राहकों को अधिक ध्यानपूर्वक अपने निकासी की योजना बनानी पड़ेगी।
मंगलवार से जीएसटी के नियमों में भी कुछ महत्वपूर्ण परिवर्तन किए गए हैं। सबसे बड़ा बदलाव मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) की व्यवस्था को लागू किया जाना है, जो करदाताओं की सुरक्षा को बढ़ाएगा। इसके अंतर्गत, जीएसटी पोर्टल पर लॉगिन करने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अपनाए जाएंगे, जिससे कर चोरी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की संभावना है। इसके साथ ही, ई-वे बिल के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अब 180 दिन से पुराने दस्तावेजों के लिए ई-वे बिल तैयार नहीं किया जा सकेगा। इस बदलाव का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला को अधिक पारदर्शी और संगठित बनाना है, ताकि व्यापार में अधिक अनुशासन आए।
टीडीएस से संबंधित जीएसटीआर-7 दाखिल करने की प्रक्रिया भी सख्त हो गई है। करदाताओं को अब इसे महीनों के हिसाब से क्रम से दाखिल करना होगा, जो पहले लचीला था। इसके अलावा, प्रमोटरों और निदेशकों को अब बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के लिए जीएसटी सुविधा केंद्र पर जाना होगा। ये कदम जीएसटी प्रणाली की पारदर्शिता को बढ़ाने और करदाता की पहचान सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं। पेंशन योजनाओं में एक नया परिवर्तन किया गया है, जिसे एक अप्रैल से लागू किया जाएगा। केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई एकीकृत पेंशन योजना (UPS) से करीब 23 लाख सरकारी कर्मचारियों को लाभ होगा। इस योजना के तहत, वे कर्मचारी जिन्होंने कम से कम 25 साल की सेवा पूरी की है, उन्हें अपनी अंतिम 12 महीने के औसत मूल वेतन के बराबर पेंशन मिलेगी। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को सेवानिवृत्त होने के बाद भी वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है, ताकि वे अपनी ज़िंदगी को आराम से जी सकें। यह योजना सेवानिवृत्ति के बाद आने वाली वित्तीय असुरक्षा को कम करने में मदद करेगी और कर्मचारियों के जीवनस्तर को बनाए रखने में सहायक होगी।
यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) का उपयोग आजकल भारतीय वित्तीय प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है, लेकिन इस सेवा से जुड़ी सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ रही हैं। विशेष रूप से, यदि आपके मोबाइल नंबर को लंबे समय से सक्रिय नहीं किया गया है और वह नंबर यूपीआई से लिंक है, तो आपको एक अप्रैल 2025 से पहले अपना नंबर अपडेट करवाना था। जिन्होंने ऐसा नहीं किया है, यूपीआई भुगतान सेवाओं तक आपकी पहुंच रोक दी जाएगी।
इसके अलावा, दूरसंचार विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, यदि किसी मोबाइल नंबर का उपयोग 90 दिनों से अधिक समय तक नहीं किया गया है, तो वह नंबर अन्य उपयोगकर्ताओं को आवंटित किया जा सकता है। इस मामले में सुरक्षा जोखिम को ध्यान में रखते हुए, यूपीआई सेवा प्रदाताओं को इन निष्क्रिय नंबरों को हटाने का निर्देश दिया गया है। यह कदम वित्तीय धोखाधड़ी और अनधिकृत लेन-देन को रोकने के लिए उठाया गया है।
मंगलवार से सेबी (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड) द्वारा विशेष निवेश कोष (SIF) लॉन्च किया गया है, जो म्यूचुअल फंड और पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं के बीच एक नया निवेश विकल्प होगा। इसके तहत न्यूनतम 10 लाख रुपये का निवेश करना होगा। यह कोष उन उच्च-नेटवर्थ व्यक्तियों के लिए लाभकारी हो सकता है, जो अपने निवेश को विविधीकरण करना चाहते हैं और अधिक रिटर्न की तलाश में हैं।
साथ ही, विभिन्न क्रेडिट कार्ड कंपनियों के रिवॉर्ड पॉइंट स्ट्रक्चर में भी बदलाव होने जा रहा है। यह बदलाव क्रेडिट कार्ड उपयोगकर्ताओं को अधिक आकर्षक और लाभकारी रिवॉर्ड्स प्रदान करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। कुल मिलाकर, मंगलवार से लागू होने वाले ये वित्तीय बदलाव देश के नागरिकों और करदाताओं के लिए महत्वपूर्ण हैं। इन बदलावों का उद्देश्य भारतीय वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और प्रभावी बनाना है। हालांकि इन बदलावों से कुछ लोगों के लिए खर्च बढ़ सकता है, वहीं कुछ अन्य को कर छूट और वित्तीय सुरक्षा के रूप में राहत भी मिलेगी। ऐसे में, इन नए नियमों के बारे में सही जानकारी होना और उनका पालन करना न केवल नागरिकों के लिए, बल्कि समग्र अर्थव्यवस्था के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।