लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
भरत तिवारी मुठभेड़ के बाद प्रशांत किशोर ने गाँव में न्यायिक जांच की निगरानी की मांग की, जिससे इस मुद्दे को नई दिशा मिली।
भरत तिवारी मुठभेड़ की पृष्ठभूमि
आरा: जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर बुधवार को भोजपुर जिले में हालिया कथित पुलिस मुठभेड़ में जान गंवाने वाले भरत भूषण तिवारी के पैतृक गांव पहुंचे और उसके परिजनों से मुलाकात की।
वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए ग्रामीणों द्वारा बुलाई गई पंचायत बैठक में भी शामिल होने वाले हैं।
जन सुराज पार्टी के पदाधिकारियों ने बताया कि भरत भूषण के परिजनों ने न्याय दिलाने में किशोर से मदद की अपील की थी और उन्हें पंचायत बैठक में आमंत्रित किया था।
किशोर ने भोजपुर में संवाददाताओं से कहा, ‘पीड़ित परिवार की मांग बिल्कुल स्पष्ट है। उन्हें न तो पैसा चाहिए, न मुआवजा और न ही सरकारी नौकरी। उन्हें न्याय चाहिए और न्याय तभी मिलेगा जब उस व्यक्ति की हत्या करने वालों तथा ऐसा करने का आदेश देने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी।’
उन्होंने मांग की कि न्यायिक जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश के बजाय कार्यरत न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए और जांच तीन महीने के भीतर पूरी की जाए।
किशोर ने कहा कि न्यायिक जांच का दायरा केवल जिला पुलिस प्रशासन तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि बिहार के गृह विभाग, विशेष कार्य बल (एसटीएफ), पुलिस महानिदेशक और राज्य के गृह मंत्री की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।
भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में बिलौती गांव के भारत भूषण तिवारी की पिछले सप्ताह पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई थी।
इस घटना को लेकर राज्य में राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे कथित रूप से फर्जी मुठभेड़ बताते हुए पुलिस पर न्यायेतर हत्या का आरोप लगाया है।
जन सुराज पार्टी ने रविवार को पटना में मोमबत्ती मार्च निकालकर तिवारी के लिए न्याय की मांग की थी।
इस बीच, बिहार सरकार के मंत्री श्रवण कुमार ने विपक्ष पर इस मुद्दे पर राजनीति करने का आरोप लगाया।
उन्होंने पटना में संवाददाताओं से कहा, ‘यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना सभी को दुखी करने वाली है। सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। विपक्ष को इसका राजनीतिकरण करने के बजाय सरकार और न्यायिक समिति के साथ सहयोग करना चाहिए ताकि पीड़ित परिवार को शीघ्र न्याय मिल सके।’
बिहार में कथित रूप से बढ़ रही मुठभेड़ों के संबंध में पूछे गए सवाल पर कुमार ने कहा कि पुलिस को आत्मरक्षा में कार्रवाई करने का अधिकार है।
उन्होंने कहा, ‘नीतीश कुमार के नेतृत्व में भी कानून का राज था और सम्राट चौधरी के नेतृत्व में भी है। यदि कोई पुलिसकर्मियों पर गोली चलाता है तो उन्हें आत्मरक्षा में कार्रवाई करने का अधिकार है।’
मुठभेड़ के बाद अधिकारियों ने कहा था कि तिवारी लगातार पुलिस पर गोलीबारी कर रहा था, जिसके जवाब में आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी थी।
हालांकि, सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में कथित तौर पर तिवारी मुठभेड़ से पहले हथियार डालते हुए नजर आ रहा है।
‘पीटीआई-भाषा’ इस वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सकी है।
तिवारी की मां की शिकायत के आधार पर इस मामले में घटना से जुड़े कई पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ और भविष्य की राह
प्रशांत किशोर की मांग और परिवार की शर्तें बिहार की राजनैतिक परिदृश्य में नई बहस को जन्म देती हैं। कई विश्लेषकों ने कहा है कि यदि न्यायिक जांच को निष्पक्ष और तेज़ी से किया गया तो सामाजिक शांति स्थापित हो सकती है।
अधिक जानकारी के लिए Wikipedia देखें।
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निष्कर्ष
भरत तिवारी मुठभेड़ का मुद्दा केवल एक स्थानीय घटना नहीं, बल्कि कानून, सुरक्षा और राजनीति के संगम पर खड़ा सवाल है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत सभी पक्षों को सुनना और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

