नई दिल्ली: केंद्र सरकार इस समय तेल कंपनियों के उस प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसमें पेट्रोल-डीजल पर प्रीमियम लगाने की मांग उठाई गई है. इससे आने वाले महीनों में डीजल-पेट्रोल के भाव में इजाफा होने की आशंका है. जानकारी के मुताबिक निजी और सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) ने सरकार से आग्रह किया है कि बीएस-6 ईंधन के विकास में होने वाले खर्च की पूर्ति के लिए उन्हें पेट्रोल-डीजल पर प्रीमियम वसूलने की मंजूरी दी जाए.ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का यह प्रस्ताव अगर सरकार स्वीकार कर लेती है, तो अगले पांच वर्षों के लिए डीजल पर 0.80 रुपये और पेट्रोल पर 1.50 रुपये प्रति लीटर प्रीमियम लगाया जा सकता है. इससे इनकी उपभोक्ता कीमत में इजाफा होगा. पिछले कई महीनों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमत में स्थिरता बनी हुई है. इसका असर तेल की खुदरा कीमत पर भी दिखाई पड़ा. इस दौरान ओएमसी द्वारा कई बार डीजल-पेट्रोल की कीमत में कटौती भी की गई है. प्रीमियम लगने के बाद ग्राहकों को अनिवार्य रूप से अतिरिक्त राशि देनी होगी.बीएस-6 ईंधन के विकास में तेल कंपनियों ने काफी निवेश किया है. सरकारी कंपनियों इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम ने इसके लिए करीब 80 हजार करोड़ रुपये निवेश किए हैं. इसके साथ ही निजी कंपनियों नयारा एनर्जी (पहले एस्सार) और रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी इसमें बड़ा निवेश किया है. कंपनियां चाहती हैं कि प्रीमियम के माध्यम से इनके निवेश का कुछ हिस्सा इन्हें वापस मिल जाए.गौरतलब है कि अगले वर्ष अप्रैल से बीएस-6 ईंधन का प्रयोग अनिवार्य कर दिया जाएगा.जानकारों के मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहन का बाजार बढ़ने से ऑयल मार्केट के दबाव में आने की आशंका है. ऐसे में अगर बीएस-6 ईंधन के विकास में खर्च किया गया फंड रिकवर नहीं होता है, तो तेल कंपनियों की मुश्किलें बढ़ सकती है. सरकार 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों को प्राथमिकता देने का संकेत पहले ही दे चुकी है.

