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    बृजेश गंझू वाराणसी मुठभेड़ में ढेर: टीएसपीसी सुप्रीमो का अंत, 30 लाख का इनामी

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 20, 2026No Comments4 Mins Read
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    बृजेश गंझू
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    लेखक: मृत्युंजय बर्मन

    बृजेश गंझू का वाराणसी में अंत

    चतरा के जंगलों से निकलकर कोयला बेल्ट में अपनी समानांतर सत्ता का नेटवर्क खड़ा करने वाले प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन टीएसपीसी के सुप्रीमो बृजेश गंझू उर्फ गोपाल सिंह भोक्ता उर्फ सरकार का रविवार को वाराणसी में अंत हो गया। झारखंड में 25 लाख और एनआईए की ओर से पांच लाख रुपये के इनाम वाले इस वांछित उग्रवादी कमांडर को उत्तर प्रदेश एटीएस ने रामनगर क्षेत्र में मुठभेड़ के दौरान मार गिराया। उसके मारे जाने की पुष्टि झारखंड पुलिस के आईजी ऑपरेशन्स एवं प्रवक्ता नरेंद्र सिंह ने आईजी एसटीएफ के हवाले से की है।

    चतरा के लावालौंग थाना क्षेत्र के लुटू सोहावन गांव का रहने वाला बृजेश गंझू लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर था। टीएसपीसी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने के बाद उसका नाम चतरा समेत झारखंड के विभिन्न इलाकों में लेवी वसूली, हिंसक वारदात और उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े मामलों में सामने आता रहा। विभिन्न रिपोर्टों में उसके खिलाफ करीब 50 आपराधिक मामलों का उल्लेख किया गया है।

    वाराणसी में बदल गया ठिकाना, एटीएस ने घेरा

    पुलिस के मुताबिक रविवार सुबह एटीएस को सूचना मिली कि बृजेश मोटरसाइकिल से टेंगरा मोड़ होते हुए रामनगर और फिर मुगलसराय की ओर जाने वाला है। लंका मैदान के पास टीम ने घेराबंदी कर उसे रोकने का प्रयास किया। पुलिस का दावा है कि उसने रुकने के बजाय टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में गोली लगने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।

    मुठभेड़ में बृजेश की ओर से चलाई गई गोलियां यूपी एटीएस के डिप्टी एसपी विपिन राय और हेड कांस्टेबल नितेंद्र कृष्ण की बुलेटप्रूफ जैकेट पर लगीं। दोनों के सुरक्षित होने की जानकारी है। पुलिस ने घटनास्थल से हथियार और कारतूस भी बरामद किए हैं।

    कोयला बेल्ट की लेवी से एनआईए की जांच तक

    बृजेश गंझू का नाम केवल स्थानीय उग्रवादी गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा। कोयला कारोबार से कथित लेवी वसूली और टेरर फंडिंग से जुड़े मामलों में एनआईए की जांच में भी उसका नाम सामने आया था। यही वजह रही कि झारखंड पुलिस के इनाम के अलावा एनआईए ने भी उसके ऊपर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

    अब सवाल, वाराणसी में किसके भरोसे था ‘सरकार’?

    बृजेश गंझू के मारे जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल उसके वाराणसी कनेक्शन को लेकर है। झारखंड के चतरा से निकलकर वह वाराणसी तक कैसे पहुंचा, वहां किसके संपर्क में था और क्या उसके लिए स्थानीय स्तर पर कोई सुरक्षित ठिकाना या नेटवर्क उपलब्ध था, इन सवालों के जवाब अब सुरक्षा एजेंसियों की जांच के केंद्र में होंगे। उसके एनकाउंटर से टीएसपीसी के शीर्ष नेतृत्व को झटका लगा है, लेकिन संगठन के स्थानीय नेटवर्क और सहयोगियों पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।

    मुख्य बिंदु

    • बृजेश गंझू उर्फ सरकार टीएसपीसी का सुप्रीमो था।
    • उस पर झारखंड में 25 लाख और एनआईए की ओर से 5 लाख का इनाम था।
    • उत्तर प्रदेश एटीएस ने वाराणसी के रामनगर इलाके में मुठभेड़ में मार गिराया।
    • उसके खिलाफ लगभग 50 आपराधिक मामले दर्ज थे।
    • कोयला बेल्ट में लेवी वसूली और टेरर फंडिंग में एनआईए जांच जारी।

    बृजेश गंझू का आपराधिक सफर और टीएसपीसी का नेटवर्क

    बृजेश गंझू ने चतरा के सुदूर जंगली इलाके से निकलकर झारखंड के कोयला बेल्ट में अपनी समानांतर सत्ता स्थापित की थी। टीएसपीसी (तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमिटी) नामक संगठन के बैनर तले वह लेवी वसूली, कोयला ढुलाई में रंगदारी और सरकारी ठेकों में हिस्सेदारी जैसे कार्यों को अंजाम देता था। उसके नेतृत्व में संगठन ने चतरा, लातेहार, पलामू और हजारीबाग जिलों में अपना प्रभाव क्षेत्र बढ़ाया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, वह संगठन के वित्तीय प्रबंधन का मुख्य सूत्रधार था और टेरर फंडिंग के लिए कोयला व्यापारियों, ट्रांसपोर्टरों और ठेकेदारों से मोटी रकम वसूलता था।

    उसके खिलाफ दर्ज मामलों में हत्या, अपहरण, रंगदारी, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, यूएपीए और आर्म्स एक्ट की धाराएं शामिल हैं। एनआईए ने टेरर फंडिंग के एक बड़े मामले में उसकी संलिप्तता पाए जाने के बाद उस पर 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। झारखंड पुलिस ने भी उस पर 25 लाख रुपये का इनाम रखा था, जो राज्य में किसी भी उग्रवादी पर घोषित सर्वाधिक इनाम राशियों में से एक है। उसके मारे जाने को झारखंड और उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।

    आगे की राह और सुरक्षा चुनौतियां

    बृजेश गंझू के खात्मे के बाद टीएसपीसी के नेतृत्व को लेकर अनिश्चय की स्थिति बनी हुई है। संगठन का सेकेंड इन कमांड कौन होगा और क्या संगठन बिखराव की ओर जाएगा, इस पर सुरक्षा विशेषज्ञों की नजर है। वाराणसी में उसके ठिकाने और स्थानीय सहयोगियों की पहचान के लिए यूपी एटीएस और झारखंड पुलिस संयुक्त रूप से जांच कर रही हैं। इस मुठभेड़ ने अंतर्राज्यीय उग्रवादी नेटवर्क की कमर तोड़ने का संकेत दिया है, लेकिन जमीनी स्तर पर कैडर की भर्ती और लेवी वसूली रोकना अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    एनआईए इनाम झारखंड उग्रवाद टीएसपीसी बृजेश गंझू वाराणसी मुठभेड़
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