हाथी तेल के नाम पर बड़ा धोखा: जांच में खुलासा
जादूगोड़ा : आपके रसोई में इस्तेमाल होने वाला “हाथी ब्रांड कच्ची घानी सरसों तेल” असली है या नकली? राष्ट्र संवाद की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि कोल्हान के सरायकेला से पूर्वी सिंहभूम तक हाथी तेल के नाम पर नकली और सस्ते तेल का बड़ा खेल चल रहा है।
डिपो रेट ₹185 प्रति लीटर होने के बावजूद बाजार में यही तेल ₹171 से ₹175 में धड़ल्ले से बेचा जा रहा है। ₹10-14 का यह मूल्य अंतर ही सबसे बड़ा सबूत है कि कुछ तो गड़बड़ है।
प्रबंधन के लिए सबसे बड़ी चुनौती
अनाधिकृत नेटवर्क
हाथी तेल के एरिया सेल्स मैनेजर रामाधार मिश्रा और मिल व डिपो मालिक राघव भगत के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती पूरे कोल्हान में फैले अनाधिकृत विक्रेताओं के नेटवर्क को तोड़ना है। सरायकेला के हाथी तेल के सबसे बड़े थोक विक्रेता हैं टोनी चौधरी और जमशेदपुर परसुडी मंडी में भी कई लोग इसके थोक विक्रेता है का सवाल है कि डिपो और थोक विक्रेताओं का रेट में भारी अंतर होने से हम लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है रोजाना दुकान में ग्राहक के साथ बहस हो रही है लोग नकली असली को लेकर काफी संकित है सूत्रों के अनुसार, जैसे ही इस गड़बड़ी की खबर बाहर आई, कई व्यापारियों ने रातों-रात नकली माल ठिकाने लगाना शुरू कर दिया। इससे साफ है कि मामला सिर्फ एक-दो दुकान का नहीं, बल्कि एक संगठित रैकेट का है।
उपभोक्ता और कंपनी दोनों को नुकसान
- उपभोक्ता के स्वास्थ्य से खिलवाड़: नकली तेल सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। FSSAI के मानकों के विपरीत ऐसे तेल गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
- कंपनी की साख पर बट्टा: असली हाथी तेल की ब्रांड वैल्यू गिर रही है।
- राजस्व का नुकसान: टैक्स चोरी कर सरकार और कंपनी दोनों को चूना लगाया जा रहा है।
इस पूरे मामले को लेकर उपभोक्ता हाथी तेल प्रबंधन से मांग करता है:
- अनाधिकृत विक्रेताओं की सूची सार्वजनिक की जाए
- दोषियों पर एफआईआर और सख्त कानूनी कार्रवाई हो
- बाजार में हर स्तर पर जांच अभियान चलाया जाए
कोल्हान के लाखों उपभोक्ता अब जवाब मांग रहे हैं – हमारी थाली तक पहुंचने वाला तेल असली है या नकली
खुदरा विक्रेता संघ ने मांग किया है कि डिपो का रेट को भी संतुलित किया जाए जिससे लोगों को भ्रम ना हो वही सरायकेला से ही पूर्वी सिंहभूम जिला के कई थोक विक्रेता के द्वारा हाथी तेल मंगवाया जाता है खुदरा विक्रेता संघ ने हाथी तेल का जांच पड़ताल करवाने की भी मांग की है जिससे दूध का दूध पानी का पानी हो सके।


