‘विधानसभा चुनाव 2026’ के ओपिनियन पोल में बंगाल और केरल में कांटे की टक्कर है। 4 राज्यों के समीकरण का पूरा चुनावी विश्लेषण ‘राष्ट्र संवाद’ पर पढ़ें।
देवानंद सिंह
देश के चार महत्वपूर्ण राज्यों पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और असम में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आए MATRIZE के ओपिनियन पोल ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि जहां कुछ राज्यों में सत्ता की राह अपेक्षाकृत साफ दिख रही है, वहीं बंगाल और केरल में मुकाबला बेहद दिलचस्प और अनिश्चित बना हुआ है।
सबसे ज्यादा नजरें पश्चिम बंगाल पर टिकी हैं, जहां सत्ता के लिए 138 सीटों का जादुई आंकड़ा पार करना जरूरी है। ओपिनियन पोल के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस (TMC) को 43% और भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 41% वोट शेयर मिलने का अनुमान है। सीटों के लिहाज से TMC को 140-160 और BJP को 130-150 सीटें मिल सकती हैं, जबकि अन्य के खाते में 8 से 16 सीटें जाने की संभावना है। ये आंकड़े साफ तौर पर बताते हैं कि बंगाल में मुकाबला बेहद करीबी है और मामूली स्विंग भी सत्ता का संतुलन बदल सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा “कामाख्या से कालीघाट” और “दक्षिण से दक्षिणेश्वर” तक अपनी पकड़ मजबूत करने का दावा कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सरकार के 15 वर्षों के कामकाज के आधार पर जनादेश मांग रही थीं, लेकिन हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों ने इस नैरेटिव को चुनौती दी है। मालदा जैसी घटनाओं की जांच एनआईए को सौंपे जाने और न्यायालय द्वारा राज्य की नौकरशाही पर उठाए गए सवालों ने भी चुनावी माहौल को प्रभावित किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “राष्ट्र प्रथम” का संदेश भाजपा के अभियान का केंद्रीय तत्व बना हुआ है। भाजपा इसे अपने शासन मॉडल की पहचान के रूप में पेश कर रही है, जबकि विपक्ष इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहा है। ऐसे में बंगाल का चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन का नहीं, बल्कि विचारधाराओं की टक्कर का भी रूप ले चुका है।
दक्षिण भारत की ओर नजर डालें तो तमिलनाडु में मुकाबला अलग रंग लिए हुए है। यहां NDA को 40% और DMK+ को 38% वोट शेयर मिलने का अनुमान है, जबकि TVK 16% वोट के साथ समीकरणों को प्रभावित कर सकती है। यह संकेत देता है कि तमिलनाडु में भी मुकाबला एकतरफा नहीं रहेगा और छोटे दलों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।
केरल में परंपरागत रूप से LDF और UDF के बीच सीधा मुकाबला होता आया है, और इस बार भी तस्वीर कुछ वैसी ही दिख रही है। ओपिनियन पोल के मुताबिक, LDF को 62-68 और UDF को 67-73 सीटें मिल सकती हैं। BJP+ को 5-8 सीटों का अनुमान है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि केरल में सत्ता परिवर्तन की संभावना बनी हुई है, लेकिन अंतर बहुत ज्यादा नहीं होगा।
पूर्वोत्तर के राज्य असम में तस्वीर अपेक्षाकृत स्पष्ट नजर आ रही है। यहां NDA को 92-102 सीटों के साथ स्पष्ट बहुमत मिलने का अनुमान है, जबकि कांग्रेस+ 22-32 सीटों तक सिमट सकती है। अन्य के खाते में 4-7 सीटें जा सकती हैं। इसका मतलब है कि असम में सत्तारूढ़ गठबंधन की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ओपिनियन पोल केवल संभावित रुझान दिखाते हैं, अंतिम नतीजे नहीं। भारतीय राजनीति में कई बार जमीनी समीकरण, स्थानीय मुद्दे, उम्मीदवारों की छवि और मतदान प्रतिशत जैसे कारक आखिरी समय में तस्वीर बदल देते हैं। विशेषकर बंगाल और केरल जैसे राज्यों में, जहां मुकाबला बेहद करीबी है, वहां एक छोटा सा बदलाव भी बड़ा असर डाल सकता है।
कुल मिलाकर, 2026 के ये चुनाव न केवल राज्यों की सरकारें तय करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी निर्धारित कर सकते हैं। बंगाल में क्या भाजपा 138 का आंकड़ा पार कर पाएगी या ममता बनर्जी अपनी पकड़ बनाए रखेंगी—यह सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है। वहीं, असम, तमिलनाडु और केरल के नतीजे भी देश की सियासत को नया संकेत देंगे।

