एक था आरोग्यंम भाग 07
आरोग्यंम अस्पताल विवाद: DRT रांची के रिकवरी ऑफिसर एवं बैंक के द्वारा आरोग्यम अस्पताल में शुरु से ही हेर फेर ?
देवानंद सिंह
जमशेदपुर। आरोग्यंम अस्पताल की नीलामी मामले में नए खुलासे सामने आए हैं। मामला जितना बढ़ रहा है, उतने ही चौंकाने वाले तथ्य उजागर हो रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, डीआरटी के पदाधिकारी और तत्कालीन AGM आर. के. मंडल की मानसा ही अस्पताल को नीलम करने की थी। डीआरटी पदाधिकारी के ट्रांसफर से ठीक पहले अचानक की गई कार्रवाई इस तथ्य को प्रमाणित करती है। वहीं, डीआरटी रांची के रिकवरी ऑफिसर और बैंक के कुछ पदाधिकारियों के बीच मिलीभगत के आरोपों से बैंक को भी भारी झटका लगा है।
उल्लेखनीय हो कि 05 जनवरी 2017 को बैंक के AGM आर के मंडल के द्वारा न्याय सदन जमशेदपुर कोर्ट मे सिविल जज सह सचिव को पत्र लिख कर प्रॉपर्टी का वैल्यू 02 करोड़ 64 लाख की बताई है,
DRT रांची के रिकवरी ऑफिसर द्वारा 28 फरवरी 2017 को पब्लिक ई ऑक्शन नोटिस 3 करोड़ 80 लाख का निकला गया जिसे बैंक ऑफ बड़ौदा द्वारा हिंदी और अंग्रेजी अखबार में दिनांक 22 मार्च 2017 को ई ऑक्शन नोटिस को छपवाया गया जिसमें 28 अप्रेल 2017 को 11 से 12 बजे तक का समय दिया गया था। जिसे DRT रांची के रिकवरी ऑफिसर द्वारा यदि कोई बीडर नहीं आया तो उसे अपने ऑर्डर सीट मे लाना चाहिए था जो की रिकवरी ऑफिसर द्वारा अपने आर्डर शीट मे 28 मार्च 2017 का आर्डर लिखा है, उसके बाद उसमे put upon 04 जुलाई 2017 लिखा गया है और उन्होंने अपने ऑर्डर सीट मे 04 जुलाई 2017 को ओवरराइट कर लिखा है। इस तरह से यदि DRT और बैंक 28 जुलाई 2017 को बैंक के द्वारा नीलामी 3 करोड़ 80 लाख में निकली गई हैं
और तो किस तरह से बैंक 5 साल 8 महीने के बाद 1 करोड़ 75 लाख मे प्रदीप कुमार डीडवानिया एवं ऋतु अग्रवाल को नीलम किया? जो की एक जांच का विषय है। जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा के द्वारा कुल टर्म लोन एवं सीसी अकाउंट मे 2 करोड़ 33 लाख 50 हज़ार दिया गया था। उसमें बैंक ने 73 लाख रुपया बिल्डिंग बनाने के उद्देश्य से दिनेश कुमार पांडे बिल्डर को दिया गया था, जिसमें से बाकी रकम हॉस्पिटल के औजार, सर्जिकल, पैथोलॉजी, x-ray, ultrasound,NICU,ICU,C-ARM,OT के लिए दिए थे। दिनांक 28/04/2017 DRT रिकवरी ऑफिसर के द्वारा जो नीलामी निकला गया है उसमें दूसरा फ्लोर तक ही प्रॉपर्टी मॉर्गेज एवं नीलामी का नोटिस निकला गया है एवं बैंक के द्वारा अखबार में दूसरा फ्लोर तक ही नीलामी का नोटिस निकला है , तो कैसे प्रदीप कुमार डीडवानिया एवं ऋतु अग्रवाल को बैंक के द्वारा तीसरा फ्लोर हैंडओवर किया गया? जो कि जांच का विषय है।
तो क्या DRT के द्वारा मुन्नी देवी, डॉ हरि प्रसाद के साथ जालसाजी किया गया? राष्ट्र संवाद का मानना है कि अस्पताल प्रबंधन को बैंक से लिए लोन का भुगतान करना चाहिए था नहीं करने की स्थिति में बैंक को पावर है और फिर नीलाम करने की परंतु जो प्रक्रिया अपनाई गई है राष्ट्र संवाद का सवाल उस पर है
आगे कई तथ्य—–

