राष्ट्र संवाद संवाददाता, गम्हरिया।
आनन्दमार्ग स्कूल कांड्रा में श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर आनन्दमार्ग की ओर से प्रथम दीक्षा दिवस धूमधाम से मनाया गया इस मौके पर मुख्य रूप से उपस्थित आनन्दमार्ग प्रचारक संघ के जिला भुक्ति प्रधान गोपाल बर्मन ने कहा कि मनुष्य का जीवन, मुक्ति की आकांक्षा एवं सदगुरु का सानिध्य ये तीनों चीजें दुर्लभ है। मनुष्य जीवन को सार्थक बनाने के लिए साधना, सेवा, सत्संग और त्याग के राह पर गम्भीरतापूर्वक चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्णिमा का यह त्यौहार आनन्दमार्ग के साधकों एवं साधिकाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। कहा कि 87वर्ष पूर्व वर्ष 1939 में आनन्दमार्ग के प्रवर्तक श्री श्री आनन्दमूर्तिजी ने श्रावणी पूर्णिमा की रात्रि में भागीरथी नदी के काशीमित्र घाट पर दुर्दांत डाकू कालीचरण बंधोपाध्याय को तंत्र दीक्षा देकर उनको देवत्व में प्रतिष्ठित किया था। वे ही बाद में कालिकानन्द अवधूत के नाम से मशहूर हुए। इसी श्रावणी पूर्णिमा के दिन मार्ग गुरुदेव ने नूतन आनन्दमार्गीय सभ्यता का सूत्रपात किया जो विश्व को नई रोशनी प्रदान कर रहा है। इसलिए इस दिवस को प्रथम रक्षा दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर संकीर्तन का आयोजन भी किया गया जिसमें काफी संख्या में साधक शामिल हुए।
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